संदीप मौर्य✍️
कटनी/तेवरी। नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम तेवरी में श्री कृष्ण रामलीला समिति के तत्वावधान में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया जा रहा है। वर्ष 1938 में स्थापित यह समिति लगातार 88 वर्षों से क्षेत्रीय कलाकारों के माध्यम से रामलीला की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। समिति के संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर बुद्ध सिंह द्वारा शुरू की गई धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आज भी स्थानीय कलाकार पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
रामलीला में स्वर्ण मृग की खोज, मारीच की मायावी लीला, माता सीता की खोज और प्रभु श्रीराम एवं वानरराज सुग्रीव की मित्रता जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। रामायण की चौपाइयों, संवादों और कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भक्तिभाव से भर दिया।
स्वर्ण मृग की माया में उलझे प्रभु श्रीराम
रामलीला के दौरान रावण की योजना के अनुसार मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता उसे प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त करती हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम मृग के पीछे जाते हैं और लक्ष्मण को माता सीता की रक्षा का दायित्व सौंपते हैं।
‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥’
स्वर्ण मृग की मायावी लीला के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया।
मारीच की मायावी पुकार और सीता हरण का प्रसंग
प्रभु श्रीराम के बाण से घायल होने के बाद मारीच श्रीराम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। यह आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को श्रीराम की सहायता के लिए जाने का आग्रह करती हैं।
`परहित सरिस धरम नहि भाई।
पर पीड़ा सम नहि अधमाई॥’
श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का भावपूर्ण मंचन
सीता की खोज के दौरान प्रभु श्रीराम की भेंट हनुमान जी से होती है। हनुमान जी उन्हें वानरराज सुग्रीव के पास ले जाते हैं। ऋष्यमूक पर्वत पर दोनों की भेंट के बाद मित्रता स्थापित होती है। सुग्रीव अपनी व्यथा श्रीराम को बताते हैं और माता सीता की खोज में सहयोग का आश्वासन देते हैं।
‘राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्रामु॥’
88 वर्षों से क्षेत्रीय कलाकार निभा रहे परंपरा
श्री कृष्णा रामलीला समिति तेवरी की विशेष पहचान यह है कि यहां क्षेत्रीय कलाकार विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रामायण के प्रसंगों को जीवंत बनाते हैं। वर्ष 1938 से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समिति के डायरेक्टर महादेव असाटी, अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह ठाकुर और उप डायरेक्टर गोलू असाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका नरेंद्र दुबे, माता सीता की भूमिका सौरभ दुबे, लक्ष्मण की भूमिका बृजेश शुक्ला, हनुमान जी की भूमिका अजय गर्ग तथा रावण की भूमिका महेंद्र गुप्ता निभा रहे हैं।
20 अक्टूबर को होगा दशहरा मेला
श्री कृष्णा रामलीला समिति द्वारा 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा मेले का आयोजन किया जाएगा। दशहरा मेला अध्यक्ष अमित लकी अग्रहरि के नेतृत्व में आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
तेवरी की यह ऐतिहासिक रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर बुद्ध सिंह द्वारा स्थापित परंपरा को 88 वर्षों से आगे बढ़ाना स्थानीय कलाकारों की मेहनत, समर्पण और धार्मिक आस्था को दर्शाता है।





