संदीप मौर्य✍️
कटनी में एक तरफ चोरी की घटनाएं सुर्खियों में हैं, तो दूसरी तरफ अब छात्रों के भविष्य से जुड़े दस्तावेजों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध तिलक कॉलेज में मार्कशीट का ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले पास, फिर एक महीने में फेल! आखिर यह कैसी व्यवस्था?
मामला एमए, एमकॉम और एमएससी प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों का है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने पहले विद्यार्थियों को पास दर्शाते हुए मार्कशीट जारी की, लेकिन महज एक महीने के भीतर दूसरी मार्कशीट जारी कर उन्हें फेल बता दिया गया। एक ही सेमेस्टर के लिए दो अलग-अलग परिणाम सामने आने से विद्यार्थियों में असमंजस और आक्रोश का माहौल है।
एनएसयूआई ने खोला मोर्चा, जवाबदेही तय करने की मांग
एनएसयूआई कटनी के जिलाध्यक्ष अजय खटीक ने मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन का सवाल है कि आखिर इस गलती की जिम्मेदारी कौन लेगा? विद्यार्थियों के मानसिक तनाव और उनके भविष्य पर पड़ने वाले असर का जवाब कौन देगा?
23 तारीख तक का समय, फिर क्या होगा?
मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई के लिए 23 तारीख तक का समय मांगा है। वहीं, एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने निष्पक्ष जांच, प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय और उनकी स्थिति के अनुरूप सही मार्कशीट जारी करने की मांग उठाई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय द्वारा जारी मार्कशीट पर ही भरोसा नहीं रहेगा, तो विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर किस पर विश्वास करेंगे? क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस गंभीर मामले की जिम्मेदारी तय कर विद्यार्थियों की समस्या का समाधान करेगा, या छात्र न्याय के इंतजार में भटकते रहेंगे?
फिलहाल, इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।





