डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने ने एशियन मास्टर्स में जीता सिल्वर

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में सफलता

नागपुर के लिए खेल जगत से गौरव की खबर सामने आई है। Second Asian Masters Swimming Championship 2026 में मुल वर्धा के डायगव्हाणे परिवार की बेटी और नागपुर की तैराक डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर ब्रेस्ट ट्रोक स्पर्धा में द्वितीय स्थान हासिल कर आंतरराष्ट्रीय सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।

बेंगलुरु में 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने ने 54 से 59 वर्ष आयु वर्ग में हिस्सा लिया।
विशेष बात यह है कि डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने पशुसंवर्धन विभाग, नागपुर में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। शासकीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है।
उनकी इस उपलब्धि में उनके बेटे यश गुल्हाने का मार्गदर्शन और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।

बेंगलुरु में आयोजित Second Asian Masters Swimming Championship 2026 में विभिन्न आयु वर्गों के अनुभवी मास्टर्स तैराकों ने हिस्सा लिया।
नागपुर की डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अपनी शानदार तैराकी का प्रदर्शन किया।
उन्होंने महिला 54 से 59 वर्ष आयु वर्ग की 200 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में द्वितीय स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की इस उपलब्धि से नागपुर के खेल जगत में खुशी का माहौल है।

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने सिर्फ एक बेहतरीन तैराक ही नहीं, बल्कि पशुसंवर्धन विभाग, नागपुर में सहायक आयुक्त के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं।
शासकीय सेवा की जिम्मेदारियों को निभाते हुए खेल के लिए समय निकालना और लगातार अभ्यास करना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है।
लेकिन डॉ. गुल्हाने ने अपनी लगन, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर दोनों क्षेत्रों में संतुलन कायम किया है।
उनकी यह उपलब्धि बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अपने जुनून को जिंदा रखा जा सकता है।

200 मीटर बैकस्ट्रोक जैसी स्पर्धा में खिलाड़ी को अपनी तकनीक, गति, सांसों पर नियंत्रण और फिटनेस पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
54 से 59 वर्ष के आयु वर्ग में एशियन स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेकर सिल्वर मेडल हासिल करना डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक संख्या है और यदि मन में जुनून हो तो किसी भी उम्र में नई उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की इस सफलता में उनके बेटे यश गुल्हाने का भी महत्वपूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन रहा है।
यश गुल्हाने ने अपनी मां के खेल सफर में गाइड और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया।
मां की मेहनत और बेटे के मार्गदर्शन के इस तालमेल का परिणाम आज एशियन स्तर के सिल्वर मेडल के रूप में सामने आया है।
यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है।

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने बताया
“बेंगलुरु में आयोजित इस एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में 200 मीटर बैकस्ट्रोक में सिल्वर मेडल हासिल करना मेरे लिए बहुत गर्व और खुशी का क्षण है। शासकीय सेवा की जिम्मेदारियों के साथ तैराकी के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग से यह संभव हो पाया। मेरे बेटे यश का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है।”

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की यह उपलब्धि विशेष रूप से महिलाओं और कामकाजी लोगों के लिए प्रेरणादायी है।
एक ओर शासकीय सेवा की जिम्मेदारी और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता की तैयारी—दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता।
लेकिन डॉ. गुल्हाने ने अपने कार्यक्षेत्र के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी सफलता हासिल कर एक मिसाल कायम की है।
उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि स्वास्थ्य, फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण को जीवन के किसी भी पड़ाव पर अपनाया जा सकता है।

डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की इस उपलब्धि पर वर्धा और नागपुर के खेलप्रेमियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है।
उनकी इस सफलता ने नागपुर का नाम एशियन मास्टर्स स्विमिंग के मंच पर गौरवान्वित किया है।
अब खेलप्रेमियों को उम्मीद है कि डॉ. गुल्हाने आने वाली प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करते हुए और अधिक पदक हासिल करेंगी।

बेंगलुरु में आयोजित Second Asian Masters Swimming Championship 2026 में नागपुर की डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने ने 54 से 59 वर्ष आयु वर्ग की 200 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में द्वितीय स्थान हासिल कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।
पशुसंवर्धन विभाग, नागपुर में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत रहते हुए खेल के क्षेत्र में हासिल की गई यह उपलब्धि निश्चित रूप से प्रेरणादायी है।
उनके बेटे यश गुल्हाने के मार्गदर्शन और सहयोग ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. प्रज्ञा गुल्हाने की यह सफलता एक संदेश देती है—जिम्मेदारियां कितनी भी हों, अगर जुनून और मेहनत कायम हो तो सफलता हासिल की जा सकती है।

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