रोजगार के नाम पर महाराष्ट्र से लोगों को लाने का आरोप, परलकोट के धरने में शामिल लोगों की भूमिका पर उठे सवाल।
धरनास्थल पर पहुंचे कई लोगों को आंदोलन के मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं होने का दावा, स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
सूरजगढ़ माइंस से जुड़े भारी वाहनों के आवागमन और परलकोट की सड़क सुरक्षा को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच सोमवार को आयोजित धरने में महाराष्ट्र क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोगों को रोजगार दिलाने का भरोसा देकर धरने में शामिल होने के लिए लाया गया, जबकि उन्हें धरने के वास्तविक मुद्दे और स्थानीय समस्याओं की पूरी जानकारी तक नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परलकोट क्षेत्र लंबे समय से सड़क, यातायात, कृषि, रोजगार और जनसुविधाओं से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में स्थानीय समस्याओं को लेकर होने वाले आंदोलन में यदि बाहरी लोगों की संख्या बढ़ती है और उन्हें मुद्दे की वास्तविक जानकारी नहीं होती, तो इससे आंदोलन की मूल भावना पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। कुछ लोग निजी स्वास्थ्य के लिए महाराष्ट्र में चल रही सूर्यगढ़ माइंस की कर रही है तारीफ। प्रोलकोट क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अगर सूर्य अगर मांस की भारी वाहन इस पर चलेगी तो क्षेत्र के जनता होगी तो कालीन भरना एवं चक्का जाम,अब देखने वाली बात होगी कि शासन प्रशासन इस पर किस प्रकार की कदम उठाती है
धरनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों से जब आंदोलन के प्रमुख मुद्दों और सूरजगढ़ माइंस के भारी वाहनों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो कथित तौर पर कई लोग स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या इन लोगों को वास्तव में क्षेत्र की समस्याओं के समर्थन में लाया गया है अथवा रोजगार संबंधी आश्वासन देकर भीड़ का हिस्सा बनाया गया है।






