परलकोट में भारी वाहनों पर घमासान, सभी दल मैदान में

परलकोट में भारी वाहनों पर बढ़ा बवाल, संयुक्त मोर्चा के बाद भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना भी मैदान में


महाराष्ट्र के सूरजागढ़ माइंस से संचालित भारी वाहनों को लेकर परलकोट इलाके में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। संयुक्त मोर्चा के चक्का जाम के बाद अब भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना ने भी अलग-अलग स्तर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। सड़क, पुल-पुलिया और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस बीच कलेक्टर के एक दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने पखांजूर एसडीएम के साथ मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त पुलिया का निरीक्षण भी किया और स्थिति का जायजा लिया।
परलकोट इलाके में सूरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों के संचालन को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मरोड़ा में परलकोट संयुक्त मोर्चा के बैनर तले एक दिवसीय चक्का जाम कर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले से जर्जर सड़कें और पुल-पुलिया भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से तेजी से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका कहना है कि यही सड़क सैकड़ों गांवों की जीवनरेखा है और इसके खराब होने से आम लोगों, मरीजों, विद्यार्थियों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि परलकोट क्षेत्र की सड़कों पर सूरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों का संचालन तत्काल बंद किया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

इधर भाजपा नेता एवं पखांजूर नगर पंचायत के उपाध्यक्ष शंकर सरकार ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नगर क्षेत्र से भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर के बीच से गुजरने वाले भारी वाहन स्कूली बच्चों, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने माइंस के वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की मांग भी की है।

वहीं कांग्रेस ने भी इससे पहले अंजड़ी नाला के क्षतिग्रस्त पुल पर चक्का जाम कर परलकोट क्षेत्र को माइंस प्रभावित घोषित करने, सड़क, पुल-पुलिया, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज तथा पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग उठाई थी। कांग्रेस का कहना है कि भारी वाहनों के कारण क्षेत्र का बुनियादी ढांचा लगातार प्रभावित हो रहा है।

उधर शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर अपनी अलग प्रतिक्रिया देते हुए भारी वाहनों से आम जनता को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई है और प्रशासन से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

लगातार बढ़ते विरोध और जनदबाव के बीच कलेक्टर के एक दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने पखांजूर एसडीएम के साथ मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त सड़क और पुलिया का निरीक्षण किया तथा वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि प्रशासन जल्द कोई ठोस निर्णय ले सकता है।

अब संयुक्त मोर्चा, भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना—चारों ओर से उठ रही मांगों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि अब तक भारी वाहनों के संचालन को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे परलकोट क्षेत्र की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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