कटनी/स्लीमनाबाद। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में अपनी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंचे स्लीमनाबाद निवासी बुजुर्ग शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह को शिकायत करना कथित तौर पर भारी पड़ गया। बुजुर्ग ने कलेक्टर आशीष तिवारी के सामने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायतें रखीं। उनका आरोप था कि उनके घर के सामने बनी नाली की लंबे समय से सफाई नहीं की जाती, जिसके कारण गंदा पानी उनके घर में भर जाता है। इसके अलावा उनके घर में नल-जल कनेक्शन नहीं दिए जाने तथा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की बात भी उन्होंने कलेक्टर के समक्ष रखी।
शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने मौके पर ही संबंधित पंचायत सचिव और सरपंच को बुलाया तथा शिकायतकर्ता की समस्या का तत्काल निराकरण कराने के मौखिक निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
कलेक्टर के जाते ही बदला माहौल?
शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह के अनुसार, कलेक्टर के जाने के बाद स्लीमनाबाद क्षेत्र के ग्राम पंचायत सचिव ने शिकायत को लेकर उनसे कथित तौर पर सख्त लहजे में बात की। सचिव द्वारा कथित रूप से कहा गया कि जब तक नल-जल सहित अन्य बकाया राशि जमा नहीं की जाती, तब तक उन्हें किसी भी शासकीय योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी ग्रामीण को अपनी समस्या शासन-प्रशासन के सामने रखने के बाद ही इस तरह की कथित चेतावनी का सामना करना पड़े, तो मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य धरातल पर कैसे पूरा होगा?
बुजुर्ग शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में कलेक्टर के सामने गुहार लगाई थी, लेकिन शिकायत के बाद कथित तौर पर उन्हें ही दबाव का सामना करना पड़ा। ऐसे में देखना होगा कि कलेक्टर द्वारा दिए गए तत्काल निराकरण के निर्देशों पर पंचायत स्तर पर कितना अमल होता है और शिकायतकर्ता की नाली, नल-जल तथा अन्य योजनाओं से जुड़ी समस्याओं का वास्तव में समाधान हो पाता है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जनविश्वास अभियान में शिकायत करना ग्रामीण के लिए राहत का रास्ता बनेगा या शिकायत के बाद उसे पंचायत स्तर पर कथित दबाव का सामना करना पड़ेगा?





