जहरीली हवा से परेशान पांच गांव, लेकिन कार्यवाही शून्य—किसके संरक्षण में चल रहा पोल्ट्री फार्म?

स्लीमनाबाद तहसील के उत्तमपुर टिकुरी में संचालित शावक हैचरी प्राइवेट लिमिटेड पर बिना अनुमति संचालन और प्रदूषण फैलाने के आरोप। ग्रामीण बोले—”अब सांस लेना भी मुश्किल, कब जागेगा प्रशासन?”
कटनी जिले की तहसील स्लीमनाबाद अंतर्गत ग्राम उत्तमपुर टिकुरी में संचालित शावक हैचरी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली तीव्र दुर्गंध ने आसपास के गांवों का जीवन दूभर कर दिया है। इस संबंध में कई बार शिकायतें करने के बावजूद आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत लखनवारा के सहायक ग्राम डूंगरहाई, नैगवां, छपरा हार एवं उत्तमपुर टिकुरी के लोग पिछले लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। पोल्ट्री फार्म में बड़े पैमाने पर मुर्गी पालन होने से निकलने वाली दुर्गंध हवा के साथ रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंचती है, जिससे लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गंध इतनी अधिक होती है कि सांस लेना कठिन हो जाता है। क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों की भरमार हो गई है। लोग न तो चैन से भोजन कर पा रहे हैं और न ही रात में ठीक से सो पा रहे हैं। बच्चों में लगातार सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि बुजुर्गों एवं अन्य लोगों में दमा, अस्थमा और टीबी जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार सीएम हेल्पलाइन, जिला प्रशासन एवं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन उनकी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
जिला प्रदूषण विभाग के दावे पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब इस संबंध में जिला पर्यावरण अधिकारी आर.पी. शुक्ला से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित पोल्ट्री फार्म के पास पर्यावरण विभाग की अनुमति उपलब्ध है।
लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। ग्रामीणों का दावा है कि दिनांक 01 अप्रैल 2026 को स्वयं जिला पर्यावरण अधिकारी आर.पी. शुक्ला ने मौके का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया था, जिसमें उल्लेख किया गया था कि पोल्ट्री फार्म बिना आवश्यक अनुमति के संचालित पाया गया तथा वहां से अत्यधिक दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को गंभीर परेशानी हो रही है।
अब सवाल यह उठता है कि यदि निरीक्षण के दौरान स्थिति कुछ और थी, तो अब विभाग द्वारा अनुमति होने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? यदि अनुमति है, तो पहले पंचनामे में बिना अनुमति संचालन का उल्लेख क्यों किया गया? और यदि पंचनामा सही था, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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