सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। विदिशा जिले की गंजबासौदा तहसील के उदयपुर स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से कांवड़िए जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचे। आखिर क्या है इस मंदिर की विशेषता, देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।
विदिशा जिले की गंजबासौदा तहसील के उदयपुर में स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1080 में राजा उदय सिंह ने कराया था। सावन के पहले सोमवार पर यहां सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
मंदिर के पुजारी के अनुसार इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सूर्योदय की पहली किरण सबसे पहले भगवान शिव के चरणों पर पड़ती है और फिर उनके मस्तक पर तिलक का आभास कराती है। यह अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है।
नीलकंठ महादेव मंदिर के चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। लगभग 15 किलोमीटर दूर से दिखाई देने वाली पहाड़ियों का स्वरूप शिवलिंग जैसा प्रतीत होता है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं।
सावन के पावन महीने में यहां का नजारा किसी विशाल मेले से कम नहीं दिखाई देता। मंदिर परिसर के बाहर फूल, प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा कंधों पर कांवड़ लेकर ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ मंदिर पहुंचते हैं और भगवान नीलकंठ महादेव का जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि सुबह लगभग चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन को भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
“यह मंदिर बहुत प्राचीन है, जिसका निर्माण राजा उदय सिंह ने कराया था। यहां सूरज की पहली किरण भगवान के चरणों पर पड़ती है और फिर मस्तक पर तिलक करती है। सावन में दूर-दूर से श्रद्धालु कांवड़ लेकर आते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं।”
आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम बने उदयपुर के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।






