संदीप मौर्य✍️
कटनी। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विभिन्न कार्यों के लिए वर्ष 2018 में प्रथम नेशनल सिक्योरिटी कंपनी को दिया गया ठेका 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। इस अवधि में कंपनी के माध्यम से करीब 150 श्रमिकों के कार्यरत होने की बात सामने आई है। अब भारतीय मजदूर संघ ने ठेका कंपनी पर श्रमिकों के न्यूनतम वेतन, पीएफ, ग्रेच्युटी सहित अन्य वैधानिक देयकों के भुगतान में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
बीएमएस द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ठेका कंपनी को श्रम कानूनों के पालन के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई गई। संगठन का दावा है कि कई बार जांच के नाम पर महज औपचारिकता पूरी की गई, जिसके चलते ठेका श्रमिकों को लंबे समय तक कथित शोषण का सामना करना पड़ा।
ज्ञापन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। बीएमएस का आरोप है कि स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत ठेका श्रमिकों से संबंधित ठेकेदार के लाखों रुपये के बिल-बाउचर प्रत्येक माह पारित किए जाते रहे, लेकिन श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ मिला या नहीं, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की गई।
बीएमएस प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जबलपुर संभाग प्रभारी कमलेश पटेल ने बताया कि इस संबंध में 1 सितंबर को सीएमएचओ को पत्र दिया गया था, लेकिन संगठन के अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का कहना है कि ठेका श्रमिकों ने भी पूर्व में श्रम अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायतें दी थीं, लेकिन ठेका कंपनी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से श्रमिकों में असंतोष है।
बीएमएस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, श्रमिकों के लंबित वैधानिक भुगतान की पड़ताल, पीएफ एवं अन्य देयकों का सत्यापन तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन की प्रतियां श्रम मंत्री, पीएफ कमिश्नर एवं सहायक श्रमायुक्त को भी भेजी गई हैं। संगठन ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
ज्ञापन सौंपते समय बीएमएस प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जबलपुर संभाग प्रभारी कमलेश पटेल, जिला मंत्री विनोद, सुरेश सिंह राठौड़, ज्वाला सिंह, शशांक एवं योगेंद्र सिंह चौहान उपस्थित रहे।





