“गहलोत का EC पर बड़ा हमला, निकाय चुनाव पर उठाए सवाल”

जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और राजस्थान के नगर निकाय चुनावों को लेकर बड़ा हमला बोला है। 23 सितंबर को 49 सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों ने उन सवालों को और गंभीर बना दिया है, जिन्हें राहुल गांधी लगातार उठाते रहे हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर पारदर्शिता नहीं है और निष्पक्ष चुनावों को लेकर लोगों का विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त करने की मांग भी की। गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर करने के लिए कानून में बदलाव किए जाने से चयन प्रक्रिया की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। अब बात राजस्थान के नगर निकाय चुनावों की। गहलोत ने आरोप लगाया कि असम की तर्ज पर राजस्थान में भी एकतरफा परिसीमन किया गया। उनके मुताबिक, कहीं चार-चार वार्डों को मिलाकर एक कर दिया गया, तो कहीं एक वार्ड को दो हिस्सों में बांटा गया। गहलोत का दावा है कि इसी वजह से चुनावी परिणाम प्रभावित हुए, जबकि जयपुर और जोधपुर समेत कई जगह कांग्रेस वोटों की संख्या में आगे रही। उन्होंने कुल वोटों में कांग्रेस के केवल 0.94 प्रतिशत पीछे रहने का भी दावा किया। निकाय चुनावों में कथित हॉर्स ट्रेडिंग और पार्षदों को दूसरे राज्यों में ले जाने के सवाल पर गहलोत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्षदों और उनके परिवारों को धमकियां दी गईं, पुराने केस खोले गए और मकान तोड़ने के नोटिस तक दिए गए। गहलोत ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के दबाव में काम करने वाले अधिकारियों ने आईएएस और आईपीएस कैडर की साख को नुकसान पहुंचाया है। गहलोत ने सभी विपक्षी दलों और विभिन्न वर्गों से राजस्थान बंद का आह्वान करने की अपील भी की। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों को लेकर उन्होंने कहा कि अब 25 सितंबर का इंतजार करना चाहिए। कुल मिलाकर, गहलोत के बयान ने चुनाव आयोग की भूमिका, परिसीमन और राजस्थान के निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि इन आरोपों और सवालों पर चुनाव आयोग और राजस्थान सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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