कानपुर के कुड़नी धाम में बुढ़वा मंगल पर आस्था का सैलाब उमड़ा, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने व्यवस्थाएं धड़ाम नजर आईं
कानपुर यूपी के कुड़नी धाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। दर्शन के लिए पहुंचे लोगों को घंटों धक्कामुक्की के बीच जूझना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल मंदिर परिसर की व्यवस्था को लेकर खड़ा हुआ है। जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी, वहीं बड़ी संख्या में दुकानें लगी थीं। इसी के बीच बाजार और तीन बड़े भंडारों का आयोजन भी किया गया।
छोटी सी जगह में दुकानें, बाजार और विशाल भंडारे—नतीजा यह रहा कि श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए रास्ता तक मुश्किल हो गया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि बड़ी संख्या में भंडारों का आयोजन बाजार और मंदिर परिसर से बाहर किसी खुले स्थान पर कराया जाता तो इतनी बड़ी परेशानी नहीं होती। कुड़नी पेट्रोल पम्प संचालक अखिलेश शुक्ला ने सूझबूझ दिखाते हुए बाजार से बाहर भंडारे का आयोजन किया जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद पाया ।
मंदिर में भीड़ का दबाव करीब 24 घंटे तक बना रहा। लोग दिनभर व्यवस्था से जूझते रहे और धक्के खाते रहे।
अब सवाल राजस्व प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर है—जब बुढ़वा मंगल पर भारी भीड़ की संभावना पहले से रहती है, तो क्या भीड़ प्रबंधन की पर्याप्त तैयारी नहीं होनी चाहिए थी?
कुड़नी धाम में श्रद्धा उमड़ी, लेकिन व्यवस्था उस श्रद्धा के सैलाब के सामने कमजोर पड़ती नजर आई। अखिलेश शुक्ला ने कहा है कि राजस्व विभाग को मेला , बाजार , भंडारे की जगह , दुकानों की जगह की व्यवस्था मंदिर परिसर से दूर होनी चाहिए





