ग्रामीण कृषि भूमि के संपरिवर्तन के बाद बैंक ऋण पर रोक का मुद्दा उठाया, वित्त मंत्री से किसान संघ की मुलाकात
कन्वर्जन के बाद भी ऋण से वंचित किसान
नई दिल्ली बूंदी ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग के लिए संपरिवर्तन कराने के बाद भी बैंक ऋण नहीं मिलने का मामला अब केंद्रीय वित्त मंत्री तक पहुंच गया है।
भारतीय किसान संघ के राजस्थान प्रदेश राजस्व प्रमुख शिवराज पुरी, बूंदी के नेतृत्व में किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस समस्या से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री को मांग पत्र सौंपकर ग्रामीण क्षेत्रों में संपरिवर्तित भूमि पर भी बैंक ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि किसान जब अपनी कृषि भूमि का सक्षम राजस्व अधिकारी के माध्यम से आवासीय, वाणिज्यिक अथवा औद्योगिक उपयोग के लिए विधिवत संपरिवर्तन कराता है, इसके बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक उस भूमि को ऋण के लिए स्वीकार नहीं करते।
किसान संघ के अनुसार, जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी अथवा तहसीलदार जैसे सक्षम अधिकारियों द्वारा भूमि का संपरिवर्तन किए जाने के बाद भी ऋण सुविधा नहीं मिलना किसानों के सामने बड़ी आर्थिक समस्या बन रहा है।
किसान संघ ने इस व्यवस्था में विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में संपरिवर्तित भूमि पर ऋण की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में इसी प्रकार की संपरिवर्तित भूमि पर ऋण नहीं मिलने से किसान अपने आवास, व्यवसाय और रोजगार संबंधी योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
संघ ने वित्त मंत्रालय से देशभर में ऐसी संपरिवर्तित भूमि पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने के संबंध में स्पष्ट और एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
मांग पत्र का मुख्य बिंदु
वित्त मंत्री को सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का संपरिवर्तन होने के बाद उस भूमि पर प्राप्त संपरिवर्तन आदेश के आधार पर किसानों को ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसान अपनी भूमि का उपयोग कर सकें और व्यवसाय तथा रोजगार को आगे बढ़ा सकें।
वित्त मंत्री से मुलाकात और मांग पत्र सौंपने के दौरान राजस्थान प्रदेश राजस्व प्रमुख शिवराज पुरी, बूंदी के साथ किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारी बद्रीलाल जाट, भीलवाड़ा, गोपाल लाल खटवड़, प्रतापगढ़, गीता लाल धाकड़, चित्तौड़गढ़ तथा सोहनलाल अंजना, निम्बाहेड़ा मौजूद रहे।
किसान संघ के अनुसार, वित्त मंत्री ने मामले को गंभीरता से विचार करने और उचित समाधान की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
समस्या विवरण संक्षेप में :
“ग्रामीण कृषि भूमि के संपरिवर्तन के बाद बैंक ऋण नहीं मिलने की समस्या अब केंद्रीय वित्त मंत्री तक पहुंच गई है। भारतीय किसान संघ के राजस्थान प्रदेश राजस्व प्रमुख शिवराज पुरी बूंदी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा।
किसान संघ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी अथवा तहसीलदार जैसे सक्षम अधिकारियों से कृषि भूमि का आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग के लिए संपरिवर्तन कराने के बाद भी कई मामलों में बैंकों से ऋण नहीं मिल पा रहा है। संघ ने इसे किसानों के लिए बड़ी आर्थिक बाधा बताते हुए देशभर में ऐसी संपरिवर्तित भूमि पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने की समान व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
संघ के अनुसार, वित्त मंत्री ने मामले पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में शिवराज पुरी के अलावा बद्रीलाल जाट, गोपाल लाल खटवड़, गीता लाल धाकड़ और सोहनलाल अंजना शामिल रहे।”






