मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित गमाकर धाम इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां पहाड़ी के अंदर भगवान भोलेनाथ के स्वयंभू स्वरूप के विराजमान होने की मान्यता है। स्थानीय पुजारी के अनुसार, इस स्थान पर पहले कोई पहाड़ नहीं था, लेकिन समय के साथ यहां पहाड़ी स्वयं प्रकट हुई और उसके अंदर भगवान शिव के दर्शन होने लगे। यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस धाम में दर्शन करने पहुंचते हैं।
यह तस्वीरें गंजबासौदा से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित गमाकर धाम की हैं, जहां पहाड़ी के अंदर भगवान शिव का मंदिर विराजमान है।
स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारी के अनुसार, कई वर्षों पहले इस क्षेत्र के आसपास कोई पहाड़ नहीं था। मान्यता है कि यहां स्वयं पहाड़ प्रकट हुआ और जब ग्रामीणों ने पहाड़ी के अंदर भगवान भोलेनाथ के स्वरूप को देखा, तब से यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया।
सावन के महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस धाम से जुड़ी कई पुरानी मान्यताएं भी हैं। पहले गांव में किसी परिवार में शादी या अन्य धार्मिक कार्यक्रम होने पर लोग यहां आकर भगवान भोलेनाथ से कार्यक्रम के लिए बर्तन मांगते थे। मान्यता के अनुसार, अगले दिन मंदिर में बर्तन मिल जाते थे। कार्यक्रम पूरा होने के बाद श्रद्धालु उन बर्तनों को वापस मंदिर में रख जाते थे।
स्थानीय पुजारी का यह भी दावा है कि यहां मौजूद पहाड़ी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी मान्यता और आस्था के चलते श्रद्धालुओं का विश्वास इस धाम के प्रति लगातार बढ़ रहा है।
सुबह तड़के करीब 4 बजे से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो जाती है। सावन के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। कोई पैदल पहुंचता है तो कोई कांवड़ लेकर भोलेनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने आता है।
गमाकर धाम आज आसपास के क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है।






