सरपंच, तत्कालीन सचिव, उपयंत्री और सरपंच पति पर 13 लाख 96 हजार 496 रुपए की वसूली निर्धारित — 15 दिन में राशि जमा नहीं हुई तो, होगी कार्रवाई

संदीप मौर्य ✍️
कटनी/बहोरीबंद। ग्राम पंचायत छपरा में कथित वित्तीय अनियमितताओं, बिना सक्षम अनुमति के चुंगी नाका संचालित कर वाहनों से राशि वसूलने, बाजार नीलामी की राशि पंचायत खाते में जमा नहीं करने तथा हाई स्कूल की बाउंड्रीवाल और नाली निर्माण में अनियमितता के मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा आदेश सामने आया है। प्रकरण में विस्तृत जांच, दस्तावेजों, अधिकारियों के प्रतिवेदनों और संबंधित पक्षों के जवाबों का परीक्षण करने के बाद सरपंच, तत्कालीन पंचायत सचिव, तत्कालीन उपयंत्री और सरपंच पति के विरुद्ध कुल 13 लाख 96 हजार 496 रुपए की राशि अधिरोपित कर वसूली की कार्रवाई निर्धारित की गई है।
आदेश में सबसे गंभीर मामला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के दो स्थानों पर चुंगी नाका/कर वसूली नाका संचालित किए जाने से संबंधित है। जांच में 20 जुलाई 2023 से 27 दिसंबर 2023 तक कुल 2 लाख 71 हजार 400 रुपए की वसूली का हिसाब दर्ज पाया गया। इसमें से पंचायत खाते में 71 हजार रुपए जमा होना पाया गया, जबकि 2 लाख 400 रुपए की राशि बकाया निर्धारित की गई है। यह राशि सरपंच पति श्री नीरज कुमार गुप्ता से वसूल किए जाने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा पंचायत के बाजारों की नीलामी से संबंधित अलग-अलग वित्तीय वर्षों की 97 हजार रुपए की बकाया राशि भी पंचायत खाते में जमा नहीं होने का उल्लेख आदेश में किया गया है। इस राशि की वसूली सरपंच श्रीमती सुषमा गुप्ता से निर्धारित की गई है।
हाई स्कूल की बाउंड्रीवाल निर्माण में स्वीकृत 320 मीटर के मुकाबले मौके पर 160 मीटर निर्माण पाए जाने के आधार पर 7 लाख 48 हजार 500 रुपए की राशि को वसूली योग्य माना गया। यह राशि सरपंच, तत्कालीन सचिव और तत्कालीन उपयंत्री के बीच समानुपातिक रूप से निर्धारित की गई है।
इसी प्रकार जुगराज सेन के घर से संतोष दुबे के घर की ओर बनाई गई आरसीसी नाली के मूल्यांकन में कथित अनियमितता के मामले में 3 लाख 50 हजार 620 रुपए की राशि वसूली योग्य निर्धारित की गई है। यह राशि भी सरपंच, तत्कालीन सचिव और तत्कालीन उपयंत्री से समानुपातिक रूप से वसूल किए जाने का आदेश है।
किसके खिलाफ कितनी राशि निर्धारित?
आदेश के अंतिम हिस्से में राशि का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। इसके अनुसार—
श्रीमती सुषमा गुप्ता, सरपंच ग्राम पंचायत छपरा — 4,63,374 रुपए
श्री गंगाराम हल्दकार, तत्कालीन पंचायत सचिव — 3,66,374 रुपए
श्री सी.बी. चौबे, तत्कालीन उपयंत्री — 3,66,374 रुपए
श्री नीरज कुमार गुप्ता, सरपंच पति — 2,00,400 रुपए
इस प्रकार कुल 13,96,522 रुपए की राशि का गणित बनता है। हालांकि आदेश के एक स्थान पर कुल अधिरोपित राशि को 13 लाख 96 हजार 496 रुपए के रूप में अंकित किया गया है। आदेश में अलग-अलग मदों में निर्धारित रकम को जोड़ने पर 26 रुपए का अंतर दिखाई देता है। यह अंतर आदेश की अंकगणितीय प्रविष्टियों में असंगति की ओर संकेत करता है, इसलिए अंतिम वसूली के लिए संबंधित कार्यालय द्वारा जारी प्रमाणित गणना/रिकवरी आदेश को आधार माना जाना महत्वपूर्ण होगा।


बिना अनुमति चुंगी नाका लगाने का मामला सबसे गंभीर
प्रकरण की शुरुआत ग्राम पंचायत छपरा अंतर्गत चुंगी नाका बैरियर के माध्यम से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों से राशि वसूली की शिकायत से हुई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बहोरीबंद के पत्र क्रमांक 1704 दिनांक 10 जनवरी 2024 में इस मामले की जांच का उल्लेख किया गया।
जांच में आरोप सामने आया कि ग्राम पंचायत छपरा के सरपंच एवं सरपंच पति द्वारा सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त किए बिना चुंगी नाका/कर वसूली नाका स्थापित किया गया और वाहनों से राशि वसूल की गई।
जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि राशि सरपंच पति की अभिरक्षा में पाई गई। पंचायत सचिव द्वारा राशि को रोकड़ बही में दर्ज किया गया था। इससे जांच अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि चुंगी नाका और कर वसूली की जानकारी पंचायत सचिव के संज्ञान में थी।
जांच में दो स्थानों पर नाका संचालित होने का उल्लेख है। पहला नाका खनिज खदानों के पूर्व छपरा से निमास मार्ग में सेग्रीगेशन शेड के कमरे के पास बताया गया। वहां दीवार पर “खनिज परिवहन जांच नाका संचालक ग्राम पंचायत छपरा” लिखा होना भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
दूसरा नाका राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ओजस्वी मार्बल खदान रोड पर संचालित होने का उल्लेख है।
सरपंच की पदमुद्रा वाली रसीदों से वसूली का उल्लेख
जांच प्रतिवेदन के अनुसार वाहनों से राशि वसूलने के लिए रसीद कट्टे का इस्तेमाल किया गया। इन रसीदों पर ग्राम पंचायत सरपंच की पदमुद्रा लगी होने का उल्लेख आदेश में है।
आदेश में यह भी कहा गया कि कर्मचारी बल्लू सेन, पिता स्वर्गीय सुकल सेन द्वारा वाहनों से नगद राशि वसूल कर रसीदें जारी की गईं। जांच के दौरान उपलब्ध कराए गए हिसाब रजिस्टर के अनुसार 20 जुलाई 2023 से 27 दिसंबर 2023 तक 2,71,400 रुपए की वसूली दर्ज थी।
इसके मुकाबले पंचायत खाते में अलग-अलग तारीखों में राशि जमा होने का रिकॉर्ड सामने आया।
जांच में 4 हजार, 4,800, 5 हजार, 53,800 और 3,400 रुपए जैसी जमा राशियों का उल्लेख किया गया है। इन राशियों को मिलाकर 71 हजार रुपए पंचायत खाते में जमा होना पाया गया।
हालांकि जांच में 14 सितंबर 2023 को जमा की गई 2 लाख रुपए की राशि को चुंगी नाका की वसूली मानने से इनकार किया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि यह राशि दिल्ली निवासी तपेश्वर कुमार कौशिक द्वारा बच्चों के लिए खेल सामग्री खरीदने के उद्देश्य से पंचायत को दिए गए अनुदान के रूप में बताई गई थी।
इस आधार पर जांच में चुंगी नाका से वसूली गई 2,71,400 रुपए की राशि में से केवल 71 हजार रुपए पंचायत खाते में जमा माना गया और 2,00,400 रुपए वसूली योग्य निर्धारित किए गए।
सरपंच पति का अलग पक्ष भी आदेश में दर्ज
प्रकरण में सरपंच पति श्री नीरज कुमार गुप्ता ने अपने जवाब में चुंगी नाका लगाए जाने को ग्राम पंचायत के कुछ लोगों के प्रस्ताव से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा।
उनका कहना था कि गांव के विकास के लिए खनिज खदानों से आने वाले वाहनों से राशि प्राप्त करने की बात थी। उन्होंने यह भी कहा कि छपरा क्षेत्र में मार्बल और बॉक्साइट खदानों से खनिज निकाला जाता है और इनसे गांव को विकास के लिए लाभ मिलना चाहिए।
उनके जवाब में यह भी उल्लेख था कि चुंगी नाके से 2,71,000 रुपए वसूल हुए थे और यह राशि पंचायत खाते में जमा कराई गई। उन्होंने अलग-अलग तारीखों में राशि जमा किए जाने का विवरण भी प्रस्तुत किया।
लेकिन आदेश पारित करने वाली प्राधिकारी ने उपलब्ध जांच प्रतिवेदनों और दस्तावेजों के आधार पर उनके बचाव को समाधानकारक नहीं माना और 2 लाख 400 रुपए की शेष राशि की वसूली का आदेश दिया।
ग्राम रोजगार सहायक के बयान ने भी बढ़ाया मामला
प्रकरण में ग्राम रोजगार सहायक का कथन भी दर्ज किया गया। उनके अनुसार छपरा-निमास मार्ग पर मार्बल पत्थर की ढुलाई करने वाले ट्रकों के कारण सड़क खराब होने की समस्या को देखते हुए ग्राम सभा में चुंगी/कर लगाए जाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी।
लेकिन सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं मिलने के कारण ग्राम पंचायत द्वारा आधिकारिक रूप से कोई कर नाका नहीं लगाया गया।
रोजगार सहायक के अनुसार बाद में सरपंच पति द्वारा अपने साथियों के साथ दो स्थानों पर नाका लगाकर ओवरलोडिंग ट्रकों से राशि वसूले जाने की शिकायत मिली। शिकायत के बाद नाका बंद कराने की कार्रवाई की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरपंच पति से वसूली की राशि का हिसाब लिया गया और 2,71,400 रुपए की राशि के संबंध में जानकारी सामने आई। उनके अनुसार पंचायत द्वारा नाका लगाने या किसी व्यक्ति को नाका लगाने की अनुमति देने का निर्णय नहीं लिया गया था।
बाजार नीलामी में भी 97 हजार रुपए बकाया
प्रकरण में ग्राम पंचायत छपरा की बाजार नीलामी भी जांच के दायरे में रही।
आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 29 मार्च 2023 को बाजार की नीलामी 80 हजार रुपए में की गई। नीलामी श्री गिरानी लाल चौहान को दी गई। इसमें से 45 हजार रुपए पंचायत खाते में जमा किए गए, जबकि 35 हजार रुपए बकाया रहे।
इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में बाजार नीलामी 75 हजार रुपए में हुई। इसमें ठेकेदार द्वारा केवल 20 हजार रुपए जमा किए गए और 55 हजार रुपए बकाया रहे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाजार नीलामी 76,500 रुपए में की गई। इसमें 69,500 रुपए जमा और 7 हजार रुपए बकाया बताए गए।
इस प्रकार आदेश में तीन वित्तीय वर्षों की बकाया राशि—
35,000 + 55,000 + 7,000 = 97,000 रुपए
निर्धारित की गई।
आदेश में यह राशि सरपंच से वसूली योग्य मानी गई है।
सरपंच ने बाजार राशि पर दिया अलग स्पष्टीकरण
सरपंच श्रीमती सुषमा गुप्ता ने अपने जवाब में कहा कि वर्ष 2023-24 की बाजार नीलामी की राशि 80 हजार रुपए थी और ठेकेदार ने 45 हजार रुपए जमा किए थे। शेष राशि जमा करने के दौरान ठेकेदार के पुत्र की मृत्यु होने के कारण वह राशि जमा नहीं कर सका।
उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार को राशि जमा करने के लिए लिखित नोटिस दिए गए थे, लेकिन उसने व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण राशि जमा नहीं की।
बाद के वर्षों की राशि को लेकर भी सरपंच ने इसी प्रकार का स्पष्टीकरण दिया। हालांकि आदेश में इन जवाबों को समग्र रूप से समाधानकारक नहीं माना गया और बकाया राशि की वसूली निर्धारित की गई।
हाई स्कूल बाउंड्रीवाल में 320 मीटर की जगह 160 मीटर
मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्राम पंचायत छपरा के हाई स्कूल परिसर में बनाई गई बाउंड्रीवाल से जुड़ा है।
तकनीकी स्वीकृति के अनुसार बाउंड्रीवाल की लंबाई 320 मीटर होनी थी। जांच के दौरान मौका स्थल पर इसकी लंबाई 160 मीटर पाई गई।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बहोरीबंद के प्रतिवेदन में उपयंत्री द्वारा 16,45,948 रुपए का मूल्यांकन किए जाने और स्वीकृत राशि 14,97,000 रुपए होने का उल्लेख किया गया।
जांच निष्कर्ष में 50 प्रतिशत कार्य होने के आधार पर 7,48,500 रुपए की राशि वसूली योग्य बताई गई।
बाद में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कटनी के कार्यपालन यंत्री द्वारा 28 जुलाई 2026 के प्रतिवेदन में पूर्व जांच के निष्कर्ष को सही पाया गया। इस प्रतिवेदन के आधार पर ही आगे वसूली की कार्रवाई प्रस्तावित की गई।
सरपंच का दावा—पूरी बाउंड्री बनी थी, बाद में गिराई गई
सरपंच श्रीमती सुषमा गुप्ता ने बाउंड्रीवाल के मामले में अपने बचाव में कहा कि 320 मीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण पूरा कराया गया था।
उनके अनुसार निर्माण के बाद कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जे का दावा करते हुए विवाद किया और रात में लगभग 150 मीटर बाउंड्रीवाल गिरा दी गई तथा संबंधित स्थान को मशीन से समतल कर दिया गया।
सरपंच ने यह भी कहा कि उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान 14 मई से 7 जून 2023 तक गांव से बाहर रहने के बाद ग्रामीणों से बाउंड्रीवाल गिराए जाने की जानकारी प्राप्त की और पुलिस में शिकायत करने के लिए आवेदन दिया।
उन्होंने 19 जुलाई 2023 को तेज तूफान के कारण एक पुराने बड़े पेड़ के गिरने से लगभग 30 मीटर बाउंड्रीवाल क्षतिग्रस्त होने का भी उल्लेख किया।
लेकिन जांच में मौके पर 160 मीटर निर्माण पाए जाने के आधार पर 7,48,500 रुपए की वसूली निर्धारित की गई।
तत्कालीन उपयंत्री ने भी रखा अपना पक्ष
तत्कालीन उपयंत्री श्री सी.बी. चौबे ने अपने जवाब में कहा कि बाउंड्रीवाल का निर्माण 320 मीटर लंबाई के अनुसार किया गया था। उन्होंने माप पुस्तिका में दर्ज मूल्यांकन का हवाला देते हुए बताया कि पिलिंथ बीम और मुख्य संरचना के निर्माण का मूल्यांकन किया गया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें बाद की जांच में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया और उनका बयान भी नहीं लिया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण के दौरान जमीन विवाद के कारण लगभग 150 मीटर की दीवार का ढांचा गिराए जाने की जानकारी मिली थी।
फिर भी कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कटनी के पुनर्परीक्षण के बाद पूर्व जांच निष्कर्ष को सही मानते हुए वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
आरसीसी नाली निर्माण पर भी 3.50 लाख की वसूली
ग्राम पंचायत छपरा में जुगराज सेन के घर से संतोष दुबे के घर की ओर बनाई गई आरसीसी नाली भी जांच के घेरे में रही।
तकनीकी स्वीकृति के अनुसार लगभग 400 मीटर नाली निर्माण का प्रावधान था। जांच में दो अलग-अलग चरणों में 100-100 मीटर नाली निर्माण का उल्लेख सामने आया।
पहले चरण के 100 मीटर कार्य का मूल्यांकन लगभग 3,50,620 रुपए किया गया। दूसरे चरण में भी 100 मीटर कार्य के लिए लगभग समान राशि का मूल्यांकन किया गया।
जांच में आरोप लगाया गया कि एक ही कार्य का मूल्यांकन दो बार किया गया।
इसी आधार पर 3,50,620 रुपए की राशि को अनियमित आहरित राशि मानते हुए वसूली योग्य निर्धारित किया गया।
सरपंच का दावा—नाली मौके पर मौजूद है
सरपंच ने अपने जवाब में कहा कि नाली निर्माण दो चरणों में किया गया था। पहले चरण में जुगराज सेन के घर से मस्जिद तक और दूसरे चरण में मस्जिद से आगे नाली बनाई गई।
उनका दावा था कि दूसरी नाली भूमिगत है और उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई है। इसलिए जांच के दौरान उसे सामान्य रूप से दिखाई नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच दल ने उनकी अनुपस्थिति में निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद नाली को उचित रूप से नहीं देखा।
ग्राम रोजगार सहायक ने भी अपने बयान में 100-100 मीटर की कुल 200 मीटर नाली बने होने की बात कही और बताया कि नाली का कुछ हिस्सा भूमिगत है।
इसके बावजूद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग की जांच रिपोर्ट में पूर्व जांच के निष्कर्ष को सही माना गया और 3,50,620 रुपए की वसूली का आधार तैयार हुआ।
बिजली बिल के 8.32 लाख के मामले का भी उल्लेख
प्रकरण में ग्राम पंचायत छपरा की नल-जल योजना के बिजली बिल का मुद्दा भी गंभीर रूप से सामने आया।
आदेश में उल्लेख है कि नल-जल योजना का विद्युत देयक 8,32,627 रुपए बकाया था। पंचायत खाते में पांचवें वित्त मद की करीब 8 लाख रुपए की राशि उपलब्ध होने के बावजूद बिजली बिल का भुगतान नहीं किए जाने की शिकायत सामने आई।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बहोरीबंद द्वारा 31 मार्च 2026 को इस संबंध में पत्र जारी किए जाने का भी उल्लेख है।
बाद में बिजली कनेक्शन विच्छेद होने की बात सामने आई, जिसके कारण ग्राम पंचायत में पेयजल संकट की स्थिति बनने का उल्लेख किया गया।
सरपंच ने अपने जवाब में कहा कि वह अपने पिता की गंभीर बीमारी और निधन के कारण कुछ दिनों के लिए बाहर थीं। उनके अनुसार तत्कालीन सचिव ने बिजली बिल के नोटिस की जानकारी उन्हें नहीं दी।
सरपंच ने यह भी दावा किया कि बिल में त्रुटियां थीं और बिजली विभाग से सुधार के लिए संपर्क किया गया। उनके अनुसार बाद में 2 अप्रैल 2026 को बिल की आधी राशि का भुगतान किया गया।
यह मुद्दा भी प्रकरण के समग्र परीक्षण में शामिल रहा, हालांकि अंतिम अधिरोपित वसूली की चार मुख्य मदों में इस बिजली बिल को अलग से राशि के रूप में निर्धारित नहीं किया गया।
कंप्यूटर ऑपरेटर के 54 हजार भुगतान का आरोप भी जांच में आया
ग्राम पंचायत में जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक 6 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से कथित दैनिक वेतनभोगी कंप्यूटर सहायक के रूप में विपिन हल्दकार को भुगतान किए जाने का आरोप भी लगाया गया था।
आरोप के अनुसार कुल 54 हजार रुपए के भुगतान का दबाव सचिव पर बनाया जा रहा था।
सरपंच ने अपने जवाब में कहा कि पंचायत भवन में विपिन हल्दकार अपना कंप्यूटर और प्रिंटर रखकर सीएससी सेंटर चलाते थे, लेकिन उन्हें पंचायत द्वारा कोई पारिश्रमिक देने का निर्णय नहीं लिया गया।
ग्राम रोजगार सहायक के कथन में भी यह सामने आया कि ग्राम पंचायत से किसी कंप्यूटर ऑपरेटर को अलग से भुगतान किया जाना नहीं पाया गया।
इसी कारण अंतिम आदेश में इस मद में कोई वसूली निर्धारित नहीं की गई।
सरपंच पति के पंचायत कार्यों में हस्तक्षेप का भी आरोप
प्रकरण में सरपंच पति श्री नीरज गुप्ता पर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए गए।
कार्यालयीन नस्ती के आधार पर आरोप लगाया गया कि पंचायत बैठकों की सूचना जारी करने, कार्यवाही में निर्णय लेने और सचिव पर दबाव बनाने जैसी गतिविधियों में सरपंच पति की भूमिका बताई गई।
यह भी आरोप था कि सचिव को कार्यवाही पंजी लिखने से रोका गया तथा निलंबित कराने की धमकी दी गई।
एक मामले में पंचायत सचिव द्वारा थाना स्लीमनाबाद में शिकायत/एफआईआर दर्ज कराए जाने का भी आदेश में उल्लेख किया गया।
सरपंच ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह स्वयं पढ़ी-लिखी हैं और पंचायत के सभी निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं। उनके अनुसार उनके पति केवल उन्हें पंचायत तक छोड़ने के लिए कभी-कभी आते हैं और पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते।
इसके बावजूद अंतिम आदेश में सरपंच पति को भविष्य में पंचायत के कार्यों में दखलंदाजी नहीं करने के लिए चेतावनी दिए जाने तथा पंचायत के सतत पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

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