“उदयपुर से ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ की शुरुआत, 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य”

राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उदयपुर से राज्य स्तरीय वन महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और घटती जैव विविधता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण और वन संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि *मिशन हरियालो राजस्थान* के तहत इस मानसून *10 करोड़ पौधे* लगाए जाएंगे। पौधारोपण के साथ-साथ उनकी जियो-टैगिंग और नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि हर पौधा वृक्ष बन सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के *’एक पेड़ मां के नाम’* अभियान का उल्लेख करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का भी प्रतीक बताया और प्रदेशवासियों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने *33 करोड़ रुपये* की लागत वाली *चंदन वन परियोजना* का शुभारंभ किया। पहले चरण में *उदयपुर, सिरोही, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़* में चंदन वन विकसित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ड्रोन सीडिंग तकनीक की शुरुआत की गई, चंदन, वन एवं वन उपज पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया तथा *13 जिलों के 600 स्वयं सहायता समूहों* को *6 करोड़ रुपये* की आजीविका प्रोत्साहन राशि भी वितरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण अब केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज का संस्कार बनना चाहिए।

वन महोत्सव के बाद मुख्यमंत्री ने उदयपुर जिले के *बीड़ा गांव (झाड़ोल)* में रात्रि विश्राम किया। रविवार सुबह उन्होंने गांव की गलियों में पैदल भ्रमण कर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों से उनकी समस्याएं सुनीं, बच्चों को दुलार किया और चॉकलेट वितरित की। मुख्यमंत्री ने *श्री आवरा माता मंदिर* में दर्शन किए, ग्रामीणों के साथ चाय पर चर्चा की और पौधारोपण भी किया।

ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल निकासी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के निर्देश दिए और स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री का यह दौरा एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने और त्वरित समाधान के प्रयासों का भी संदेश देता है।

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