थाने में खाकी का रौद्र रूप, हक मांगने गए स्ट्रीट वेंडर्स पर बरसी लाठियां
कानून की रक्षा करने वाली खाकी जब खुद ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? कुछ ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ पिछले डेढ़ साल से ईमानदारी से प्लेटफॉर्म नं 1 के बाहर अपना ठेला लगाने वाले गरीब स्ट्रीट वेंडर्स को RPF पुलिसिया प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। अपनी रोज़ी-रोटी बहाल करने की गुहार लगाई है अपनी बात रखने को लेकर शंकर लाल वाली ने आरोप लगाया है जब ये दुकानदार RPF थाना प्रभारी से मिलने पहुँचे, तो उन्हें बंद कमरे में बेरहमी से पीटा गया। पीड़ितों का आरोप है कि आरक्षक द्वारा दूसरे दुकानदारों से मोटी रकम तय कर लेने के कारण उन्हें जबरन हटाया जा रहा था और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो पैरों में रस्सी बांधकर उन पर बेरहमी से पट्टे और लाठियां बरसाई गईं, जिससे कई वेंडर्स गंभीर रूप से घायल हो गए।
सच्चाई छुपाने के लिए रची ‘फर्जी पत्रकार’ की साज़िश, दहशत में दुकानदार
अपनी इस बर्बरता पर पर्दा डालने के लिए आरपीएफ पुलिस ने इस मामले को एक नया और झूठा मोड़ दे दिया। पीड़ितों ने शनिवार रविवार की मध्यरात्रि 12.30 बजे मीडिया के सामने खुलासा किया कि पुलिस ने उनके खिलाफ फर्जी पत्रकार बनकर अवैध वेंडर्स को डराने और महिलाओं का वीडियो बनाने का बिल्कुल झूठा केस दर्ज किया है। इस खौफनाक मारपीट के दौरान अपनी जान बचाकर भागा एक बिरयानी वेंडर पिछले दो दिनों से लापता है, जिससे उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि वे हर महीने तय की गई रिश्वत की रकम पुलिसकर्मियों को देते थे, लेकिन अधिक पैसों के लालच में आज उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया है। अब पीड़ित दुकानदारो ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कर न्याय की आस में सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।






