CM हेल्पलाइन की ‘घुट्टी’ से जागी अस्पताल प्रशासन की नींद; एल्गिन में बदहाली का बोलबाला
जबलपुर। सरकारी तंत्र में जब सुनवाई के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ही आखिरी उम्मीद बचती है। जबलपुर के प्रतिष्ठित रानी दुर्गावती (एल्गिन) महिला अस्पताल में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं से जूझ रहे एक परेशान मरीज के परिजन ने जब CM हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, तब जाकर अस्पताल प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुली।
शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन मुख्तार राशिद ने सुविधाओं के अभाव और स्टाफ के अमानवीय व्यवहार से तंग आकर शासन स्तर पर गुहार लगाई थी। शिकायत दर्ज होते ही जिला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। इसी दबाव के बीच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी ने मामले को बेहद संगीन बताते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
अस्पताल के ‘कड़वे’ सच: बाइट के प्रमुख अंश
परिजनों ने अस्पताल की जो जमीनी हकीकत बयां की है, वह विचलित करने वाली है:
दूषित पानी और छिपकली: वाटर कूलर में ठंडा पानी तो दूर, कल उसमें मरी हुई छिपकली मिलने से हड़कंप मच गया। मरीज के परिजन ₹20 की बोतल खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
गर्मी की मार: वार्डों में लगे कूलर शो-पीस बने हुए हैं। नवजात बच्चों के साथ महिलाएं पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं।
स्टाफ की अभद्रता: परिजनों का सीधा आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ (विशेषकर माया मैडम) का व्यवहार मरीजों के प्रति बेहद संवेदनहीन और डराने-धमकाने वाला है।
CMHO के कड़े निर्देश: जांच और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शिकायत और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद डॉ. नवीन कोठारी ने कहा:
”यह मामला गंभीर है। CM हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायत और अस्पताल की अव्यवस्थाओं की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर सख्त कार्रवाई होगी।”
निष्कर्ष: एल्गिन अस्पताल का यह मामला बताता है कि बिना ‘ऊपर’ की डंडा प्रक्रिया के, निचले स्तर पर व्यवस्थाएं सुधरना आज भी एक बड़ी चुनौती है।






