मुर्दे कर रहे मनरेगा में मजदूरी, ले रहे हैं भुगतान

संदीप मौर्य ✍️
कटनी/बहोरीबंद: जिले की बहोरीबंद जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बरही में भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मनरेगा योजना की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां मृत व्यक्तियों के नाम पर न केवल काम दिखाया गया, बल्कि उनके नाम से हाजिरी भरकर मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया। यह घोटाला ग्राम पंचायत स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च पदाधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत बरही में मनरेगा के तहत किए गए कई कार्यों में उन लोगों के नाम दर्ज हैं, जो इस दुनिया को छोड़ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इन मृत व्यक्तियों के जॉब कार्ड अब भी सक्रिय हैं और उनके नाम पर मजदूरी का भुगतान भी किया गया है। जाँच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ मृतकों के नाम पर ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रामों और संपन्न लोगों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी की मोटी राशि का गबन किया जा रहा है।

कौन हैं जिम्मेदार?

इस घोटाले में ग्राम पंचायत बरही के सरपंच और सचिव की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्रों का आरोप है कि पूरे भ्रष्टाचार को जनपद पंचायत बहोरीबंद सीईओ अभिषेक झा और पंचायत इंजीनियर का संरक्षण प्राप्त है यह भी आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मृत लोगों के नाम पर कार्य दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

क्या बोले सीईओ अभिषेक झा

जब इस संबंध में जनपद पंचायत सीईओ अभिषेक झा से बात की गई, तो उन्होंने स्वयं इस मामले को स्वीकार करते हुए बताया कि “कुछ मृत व्यक्तियों के नाम पर हाजिरी भरकर भुगतान किया गया है। मामला संज्ञान में है और जांच समिति गठित कर दी गई है।”

जांच और कार्रवाई पर सवाल

भले ही जांच के आदेश जारी कर दिए गए हों, लेकिन ग्रामीणों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो लाखों रुपये के गबन का बड़ा खुलासा संभव है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि कलेक्टर आशीष तिवारी स्वयं इस मामले की मॉनिटरिंग करें और दोषी अधिकारियों, सरपंच-सचिव पर FIR दर्ज की जाए। जनता का कहना है कि यदि अब भी कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो भ्रष्टाचारियों के हौसले और बुलंद होंगे और सरकार की योजनाएं गरीबों तक नहीं पहुंच पाएंगी।

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