भादो मास के प्रथम सोमवार को लगा विशाल मेला, दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु।
डबरा से 35किलोमीटर दूर जगल में प्राचीन गंगाराम मोतीराम कुबेर महराज एवं बेटीवाई का प्राचीन मंदिर स्थित है, यह प्रतिवर्ष कि भाति इस वर्ष भी भादो मास के प्रथम सोमवार को विशाल मेले का आयोजन किया गया। बताया जाता है कि यह पर एक प्राचीन गुरुकुंड है, जहां मेले में पहले श्रद्धालु पहुंते है और गुरुकुंड में दिव्य स्नान करते हैं एवं अपने अपने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर पुण्यलाभ अर्जित करते हैं,मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।मान्यताओं के अनुसार भादो मास में श्रद्धालु अपने-अपने देवी-देवताओं को गुरु कुंड में दिव्य स्नान कराते हैं। इसके बाद महाराजा मोतीराम गंगाराम से आज्ञा लेकर अपने देवस्थानों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिजनों के सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्थान हिडायला सरकार के नाम से भी जाना जाता है,इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख महाभारत काल से जुड़ा हुआ बताया जाता है। लोगों की मान्यता है कि यह स्थान राजा महाराजा कुबेर गंगाराम मोतीराम कि गद्दी है जो त्याग और तपस्या की स्थली रही है, एक मान्यता के अनुसार जहां पर एक दिव्य कुंड है जिसमें 24घंटे जलधारा अवरल वहती रहती है। जहां पर प्राचीन गुरु गोरखनाथ कि तापोंस्थली भी है यहां कालांतर में गुरु गोरखनाथ ने घोर तपस्या की थी। उनके तप से कुंड में अवरल जल धारा वहती रहती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कालांतर में इसी क्षेत्र में राजा गंगाराम और मोतीराम के बीच भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें कई राज्यों के राजा वीरगति को इस स्थान पर प्राप्त हुए हैं।इन वीरों की स्मृति आज भी गांव खैरो में पूजन परंपरा के रूप में जीवित होने की बात स्थानीय लोग बताते हैं।मंदिर से जुड़े पुजारी पंडित हरि शर्मा ने बताया कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और यहां कई राजाओं के बीच युद्ध होने की बात बताई जाती है,उन्होंने बताया कि भादो मास में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से भादो मास में श्रद्धालु गुरुकुंड में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं उसके बाद श्रद्धालु अपने-अपने देवस्थानों पर जा कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार एवं परिजनों के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।भादो मास के प्रत्येक सोमवार को यहां विशाल मेले का आयोजन होता है,इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन भी कराए जाते है।
प्रथम सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं इस मेले में पहुंचकर धार्मिक परंपराओं एवं मानताओ में के साथ पूजन करते है।





