संदीप मौर्य ✍️
स्लीमनाबाद। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 26 वर्षीय महिला की मौत के बाद स्लीमनाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय पर उपचार उपलब्ध नहीं कराने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि घायल महिला करीब चार घंटे तक अस्पताल में उपचार की प्रतीक्षा करती रही, लेकिन ड्यूटी पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण महिला की मौत होने का आरोप लगाया गया है।
मामला यहीं नहीं थमा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारियों पर मृतका के कान, हाथ और पैरों में पहने गहने निकालने का भी आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि गहने निकालने के दौरान मृतका का कान भी क्षतिग्रस्त हो गया। इन गंभीर आरोपों के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, महिला की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा तथा उपचार में कथित लापरवाही एवं गहने निकालने के आरोपों की पुष्टि भी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
पिकअप की टक्कर से घायल हुई थी लक्ष्मी बाई
जानकारी के अनुसार 26 वर्षीय लक्ष्मी बाई अपने मायके झिन्ना पिपरिया से स्लीमनाबाद के समीप ग्राम भरदा बड़खेरा स्थित अपनी ससुराल लौट रही थी। इसी दौरान स्लीमनाबाद क्षेत्र में एक पिकअप वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
हादसे के बाद परिजन घायल लक्ष्मी बाई को तत्काल उपचार के लिए स्लीमनाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद घायल महिला को समय पर आवश्यक चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल सका।
“चार घंटे तक तड़पती रही महिला”, परिजनों ने डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल
परिजनों के अनुसार लक्ष्मी बाई करीब चार घंटे तक अस्पताल में उपचार की प्रतीक्षा करती रही। आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। गंभीर रूप से घायल महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही और अंततः उसकी मौत हो गई।
परिजनों का सवाल है कि यदि सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के बाद भी समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलती, तो ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य क्या रह जाता है?
घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और ड्यूटी के समय संबंधित चिकित्सक व कर्मचारी अस्पताल में मौजूद थे या नहीं।
मृतका के गहने निकालने का आरोप, कान क्षतिग्रस्त होने की शिकायत
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारियों पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मृतका के कान, हाथ और पैरों में पहने गहने अस्पताल में निकाल दिए गए।
परिजनों का आरोप है कि गहने निकालने के दौरान मृतका का कान भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश देखा गया और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
यह आरोप यदि जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अस्पताल में मृतक मरीजों के साथ अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और कर्मचारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
मौत की जानकारी के बाद डॉक्टर से विवाद, अभद्रता का आरोप
परिजनों के मुताबिक जब उन्हें लक्ष्मी बाई की मौत की जानकारी मिली तो अस्पताल में मौजूद डॉ. आयुषी से उनकी कहासुनी हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई।
बीएमओ ने कहा—ड्यूटी पर थे अनुराग शुक्ला और डॉ. दिव्या, लेकिन मौजूद नहीं थे
मामले में बीएमओ आनंद अहिरवार से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि घटना के समय अनुराग शुक्ला और डॉ. दिव्या की ड्यूटी निर्धारित थी, लेकिन दोनों मौके पर मौजूद नहीं थे।
बीएमओ के इस बयान के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में गंभीर सड़क दुर्घटना का मरीज उपचार के लिए पहुंचा था, तब ड्यूटी पर नियुक्त चिकित्सक आखिर मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे?
बीएमओ के अनुसार अनुराग शुक्ला को पूर्व में भी कथित लापरवाही के मामलों में कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। अब इस नए मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।






