विमुक्त जाति दिवस पर छलका महिलाओं का दर्द: “सभा में बुलाते हैं, नाश्ता कराकर भेज देते हैं, योजनाओं का लाभ आज तक नहीं मिला”

संदीप मौर्य✍️

कटनी। विमुक्त घुमंतू एवं अर्धघुमंतू कल्याण विभाग द्वारा विमुक्त जाति दिवस के उपलक्ष्य में जिला पंचायत कटनी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब ग्राम बिरुह की महिलाओं ने मंच के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए विभागीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया।
महिलाओं ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि अर्धघुमंतू एवं विमुक्त समाज के लोगों को हर वर्ष इस तरह के कार्यक्रमों और सभाओं में बुलाया तो जाता है, लेकिन उनके जीवन स्तर में सुधार लाने वाली योजनाओं का वास्तविक लाभ अब तक नहीं मिल पाया है।
महिलाओं का आरोप था कि “हम लोगों को हर साल सभा में बुला लिया जाता है, नाश्ता और समोसा खिलाकर वापस भेज दिया जाता है, लेकिन आज तक विभाग की किसी योजना का लाभ नहीं मिला।” महिलाओं ने सवाल उठाया कि यदि विमुक्त एवं अर्धघुमंतू समाज के कल्याण के लिए विभाग और योजनाएं संचालित की जा रही हैं, तो फिर समाज के जरूरतमंद परिवार आज भी लाभ से वंचित क्यों हैं।
कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं और प्रशासन से योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की। महिलाओं के अनुसार, समाज के लोग आज भी अपनी मूलभूत जरूरतों और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता है। कार्यक्रम के दौरान विधायक के समक्ष भी जब योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया, तो महिलाओं को ठोस जवाब या समाधान नहीं मिल पाने की शिकायत सामने आई।
“अर्धघुमंतू समाज आखिर अपनी आवाज किसके सामने रखे?” यह सवाल कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं की पीड़ा के रूप में सामने आया। जिन लोगों के कल्याण और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभाग बनाया गया है, वही समाज आज अपने अधिकार और योजनाओं का लाभ पाने के लिए भटकने को मजबूर होने का आरोप लगा रहा है।
विमुक्त एवं अर्धघुमंतू समाज की महिलाओं ने मांग की है कि केवल औपचारिक कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय जिले में पात्र परिवारों का सर्वे कर उन्हें आवास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विभागीय योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाया जाए।
अब सवाल यह है कि विमुक्त जाति दिवस के मंच से उठी इन महिलाओं की आवाज संबंधित विभाग और प्रशासन तक केवल शिकायत बनकर रह जाएगी या फिर वास्तव में उन परिवारों की सूची तैयार कर योजनाओं का लाभ दिलाने की ठोस कार्रवाई की जाएगी?

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