अंतागढ़ में विश्व आदिवासी दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, 70 हजार से अधिक लोगों ने दिखाई एकजुटता
हक-अधिकार की गूंज के बीच आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों पर हुई चर्चा।
कांकेर जिले के अंतागढ़ में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में 70 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी रही। इस दौरान आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों के साथ-साथ संविधान में दिए गए अधिकारों को लेकर वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
दूर-दूर से पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। विशाल जनसमूह के बीच पूरा क्षेत्र आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आये। कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने नई पीढ़ी से अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से होती है, जिसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। विश्व आदिवासी दिवस के मंच से जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समाज के अधिकारों की बात भी प्रमुखता से उठी। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति और अपनी जमीन से जुड़ा रहा है, इसलिए अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक रहना होगा।कार्यक्रम में अंतागढ़ विधानसभा के विधायक श्री विक्रम देव उसेंडी भी शामिल हुए। विधायक पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में कार्यक्रम में पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में समाज के लोग भी पारंपरिक परिधान में नजर आए। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति और एकजुटता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला ।विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अंतागढ़ में उमड़ा यह जनसैलाब आदिवासी समाज की एकजुटता और अपनी संस्कृति, परंपरा एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता की तस्वीर पेश कर रहा है। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने एक स्वर में अपने हक और अधिकारों की बात रखी, वहीं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश भी दिया।”
अंतागढ़ में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का यह कार्यक्रम केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, संवैधानिक अधिकारों और आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का संदेश भी देता नजर आया। विशाल जनसमूह के बीच कार्यक्रम का समापन आदिवासी एकता और सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ हुआ।
विश्व आदिवासी दिवस पर अंतागढ़ में उमड़ा जनसैलाब”
“70 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा”
“जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारो की उठी आवाज”
“पारंपरिक वेशभूषा में नजर आया आदिवासी समाज।





