सीएम हेल्पलाइन के दबाव के खिलाफ सचिव, रोजगार सहायक और सरपंचों का प्रदर्शन
एंकर:
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण के नाम पर अधिकारियों द्वारा दबाव और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए विदिशा में पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच संगठन एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। संगठनों ने घोघरा पंचायत के सचिव राम सिंह विश्वकर्मा की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के लिए जिला पंचायत प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतक के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति की मांग की।
VO-1:
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को हर हाल में “संतुष्टिपूर्वक बंद” कराने के लिए अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जाता है। कर्मचारियों से दिन-रात शिकायतकर्ताओं के घर जाकर शिकायत बंद कराने को कहा जाता है और ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। उनका कहना है कि इस दबाव के कारण कर्मचारी मानसिक तनाव में काम कर रहे हैं।
VO-2:
संगठन का कहना है कि घोघरा पंचायत के सचिव राम सिंह विश्वकर्मा 18 जुलाई की रात करीब 8:40 बजे सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का निराकरण करने शिकायतकर्ता के घर पहुंचे थे। शिकायत बंद कर उसकी जानकारी अधिकारियों को भेजने के बाद जब वे वापस लौट रहे थे, तभी सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि अधिकारियों का दबाव नहीं होता तो यह घटना नहीं होती। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ ओमप्रकाश सनोडिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
VO-3:
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मृतक सचिव के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति और आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा प्रणाली में बदलाव किया जाए ताकि कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पेंशन और अन्य योजनाओं की राशि शासन स्तर पर लंबित रहती है, लेकिन उसका जिम्मेदार सचिवों और रोजगार सहायकों को ठहराया जाता है, जो उचित नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
आउट्रो:
फिलहाल सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच संगठनों ने अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंप दिया है। अब देखना होगा कि शासन और जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और मांगों पर क्या कार्रवाई करता है।





