कोतवाली में पत्रकारों को दी जान से मारने की धमकी,
पुलिस की शिथिलता के खिलाफ पत्रकारों का धरना भू-माफिया महिला और उसके साथियों पर अभद्रता का आरोप
कोतवाली प्रभारी के सामने दी ‘बीमा करवा लेने’ की चेतावनी
वृंदावन। तीर्थनगरी वृंदावन की कोतवाली में उस समय कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं, जब एक कथित भू-माफिया महिला और उसके साथियों ने पुलिस की मौजूदगी में ही पत्रकारों के साथ गाली-गलौज की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस द्वारा आरोपियों पर कोई कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित सैकड़ों पत्रकारों ने कोतवाली के मुख्य द्वार के बाहर ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पत्रकारों का साफ कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता,
तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
पूरा मामला भू-माफिया शिखा शर्मा नामक महिला से जुड़ा है, जो जगह-जगह भूमि कब्जा करने के मामलों में कुख्यात बताई जाती है। कुछ दिनों पूर्व पत्रकार राज चौधरी एक खबर की कवरेज करने गए थे, जहां उक्त महिला एक निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए खड़ी थी। आरोप है कि समाचार कवरेज से बौखलाई शिखा शर्मा ने पत्रकार के साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया और उन्हें गालियां दीं। इसी मामले की लिखित शिकायत और तहरीर देने के लिए जब पीड़ित पत्रकार सोमवार दोपहर वृंदावन कोतवाली पहुंचे, तो दूसरी तरफ से आरोपी महिला शिखा शर्मा और उसका पति प्रकाश शर्मा भी पत्रकारों के विरुद्ध तहरीर देने वहां आ धमके।
कोतवाली परिसर में पत्रकारों को देखते ही शिखा शर्मा और उसके साथ आए लोग आग बबूला हो गए। वहां मौजूद प्रकाश शर्मा, शिखा शर्मा, दीपक शर्मा उर्फ सैंडी एवं तीन अन्य अज्ञात लोगों ने पत्रकारों से अभद्रता की और वृंदावन कोतवाली प्रभारी संजय पांडे के सामने ही उन्हें जान से मारने की खुली धमकी दी। इन आरोपियों द्वारा सरेआम चुनौती देते हुए बेहद दुस्साहस के साथ कहा गया कि सभी पत्रकार अपना-अपना बीमा करवा लें, क्योंकि तुम लोगों को गोली मार दी जाएगी, कम से कम बाद में तुम्हारे परिवार को कुछ ना कुछ तो मिल जाएगा।
हैरानी की बात यह रही कि कोतवाली परिसर के भीतर दी गई यह इतनी बड़ी और सनसनीखेज धमकी सीधे कोतवाली प्रभारी के सामने घटित हुई, लेकिन उन्होंने कथित भू-माफिया महिला और उसके गुर्गों को रोकने या टोकने का कोई प्रयास नहीं किया। आरोपी महिला और उसके साथी बड़े ही रसूख और शान के साथ कोतवाली से वापस चले गए।
पुलिस के इस ढुलमुल और निराशाजनक रवैये से नाराज पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कोतवाली के बाहर ही जमीन पर बैठकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उक्त महिला पर पहले से ही आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो साफ तौर पर अपराधियों को पुलिसिया संरक्षण मिलने की बात को दर्शाता है।
इस विशाल विरोध प्रदर्शन में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। पत्रकारों के इस हक की लड़ाई में व्यापार मंडल एवं कई सामाजिक संगठनो का भी भरपूर समर्थन मिला। धरने में अनुपम आचार्य, विपिन पाराशर, नितिन गौतम, पवन गौतम, महेश गोस्वामी, पुनीत शुक्ला, अभिषेक शर्मा, राजा तिवारी, कपिल गोस्वामी, लाखन तोमर, जहीर आलम, शुभम शर्मा, आनंद शर्मा, प्रमेंद्र अस्थाना, वैभव भारद्वाज, विकास अग्रवाल, प्रेम कौशिक, अमित शर्मा, पुनीत शर्मा, संजय सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय पत्रकार मुस्तैद रहे। वहीं व्यापारियों की तरफ से व्यापार मंडल के सभी पदाधिकारी जिनमें धनेंद्र अग्रवाल बॉबी, आलोक बंसल, लक्ष्मी नारायण तिवारी एवं कई अन्य गणमान्य व्यापारी भी पत्रकारों के कंधे से कंधा मिलाकर धरने पर डटे रहे।






