संदीप मौर्य✍️
कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई का लाभ, किसानों से बोले—”जमीन मत बेचिए, यह इलाका पंजाब-हरियाणा को पीछे छोड़ेगा“
कटनी/स्लीमनाबाद
मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद नर्मदा टनल परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को स्लीमनाबाद पहुंचकर लगभग 12 किलोमीटर लंबी टनल का निरीक्षण किया और इसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में इसे विंध्य क्षेत्र के लिए “अमृतधारा” बताते हुए कहा कि यह परियोजना आने वाले समय में कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों की तस्वीर बदल देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से इन पांच जिलों के करीब ढाई लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई का विस्तार होगा, लाखों लोगों की पेयजल समस्या का समाधान होगा तथा कई स्थानों पर जलविद्युत उत्पादन की भी संभावना बनेगी। उन्होंने इसे प्रदेश की सबसे चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक सिंचाई परियोजनाओं में से एक बताया।
12 किलोमीटर लंबी टनल, 1600 करोड़ से अधिक की लागत
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी परियोजना इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके निर्माण में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर टनल की गहराई 120 फीट तक है तथा इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि भीषण भूकंप आने की स्थिति में भी लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। भविष्य में यह परियोजना इंजीनियरिंग संस्थानों में केस स्टडी के रूप में पढ़ाई जाएगी।
नर्मदा का जल अब गंगा बेसिन तक पहुंचेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विज्ञान और इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है कि नर्मदा का जल अब इस टनल के माध्यम से गंगा बेसिन तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि अब सोन नदी क्षेत्र और उससे जुड़े इलाकों में भी हरियाली आएगी। इससे विंध्य और बुंदेलखंड के उन क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा जहां वर्षों से पानी की कमी किसानों की सबसे बड़ी समस्या रही है।
रबी सीजन में एक लाख हेक्टेयर को मिलेगा पानी
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आगामी तीन माह के भीतर रबी सीजन के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में एक समय सिंचाई का रकबा केवल 7.5 लाख हेक्टेयर था, जिसे पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों ने बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर किया और पिछले ढाई वर्षों में यह बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
इन जिलों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि 152 क्यूबिक डिस्चार्ज क्षमता के माध्यम से परियोजना से निम्न क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी—
सतना – 1,04,970 हेक्टेयर
मैहर – 54,227 हेक्टेयर
कटनी – 21,823 हेक्टेयर
रीवा – 3,532 हेक्टेयर
पन्ना – 448 हेक्टेयर
कुल मिलाकर लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया को सीधे सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों सहित परियोजना का कुल लाभ क्षेत्र करीब ढाई लाख हेक्टेयर तक पहुंचेगा।
“किसान जमीन न बेचें, भविष्य बदलने वाला है”
मुख्यमंत्री ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बघेलखंड और बुंदेलखंड कृषि उत्पादन के क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ सकते हैं। इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा, पलायन रुकेगा, उद्योग और व्यापार को गति मिलेगी तथा किसानों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि होगी।
टनल के ऊपर कटनी नदी, नीचे बहेगी नर्मदा
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना अपनी संरचना के कारण भी बेहद अनूठी है। एक ओर टनल के भीतर नर्मदा का जल प्रवाहित होगा, जबकि दूसरी ओर टनल के ऊपर से कटनी नदी बहती रहेगी। यह निर्माण भारतीय इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
संघर्ष और चुनौतियों से मिली सफलता
मुख्यमंत्री ने परियोजना के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2015 तक केवल 1406 मीटर टनल की खुदाई हो पाई थी, जिससे परियोजना की गति धीमी थी।
इसके बाद वर्ष 2016 में जर्मनी से लाई गई आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) के माध्यम से अपस्ट्रीम दिशा से कार्य तेज किया गया। कठोर चट्टानों, भूगर्भीय चुनौतियों और तकनीकी कठिनाइयों के बावजूद इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों ने लगातार तीन-तीन शिफ्टों में कार्य किया और आखिरकार वर्ष 2026 में परियोजना सफलता के अंतिम चरण तक पहुंच गई।
किसानों, व्यापारियों और पूरे विंध्य के लिए नई उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे व्यापार, उद्योग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। किसानों की आय बढ़ेगी, जल संकट कम होगा और पूरे विंध्य क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।





