कागजों में नीति सख्त, ज़मीनी हकीकत में लचरः दो से ज्यादा बच्चे, फिर भी सरकारी नौकरी बरकरार

मध्य प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में 2001 में यह नीति लागू की थी कि अगर किसी व्यक्ति की तीसरी संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद होता है, तो वह व्यक्ति न तो शासकीय सेवा में नियुक्त किया जाएगा और न ही पंचायत/नगरीय निकाय चुनाव लड़ सकेगा। इस कानून का उद्देश्य राज्य में जनसंख्या की वृद्धि को नियंत्रित करना और संसाधनों का बेहतर वितरण करना था। परंतु यह कानून आज खुद सरकारी तंत्र के हाथों खोखला होता नजर आ रहा है। कई विभागों में दो से अधिक संतान वाले कर्मचारी न सिर्फ कार्यरत हैं, बल्कि उन्हें नौकरी से हटाने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास तक नहीं किए गए हैं।
जमीनी मामलाः कटनी जिले की तहसील स्लीमनाबाद के ग्राम छपरा निवासी तहसील ढीमरखेड़ा में पटवारी पद पर पदस्थ शैलेन्द्र झारिया एवं उनकी पत्नी स्लीमनाबाद तहसील में शिक्षक के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला देवरी छपरा मे शिक्षक, है । आज के दौर में लड़का ,लड़की बराबर है मगर यहाँ कुछ और ही है पुत्र की चाह में चार संतान हो गई इन दोनों शासकीय कर्मचारियों के तीन लड़की और एक लड़का है । लड़का सबसे छोटा है इससे साफ स्पष्ट होता है की पुत्र की चाह के चलते चार संतान हुई है।जानकारी के मुताबिक नियुक्ति होने के बाद तीन संतानों का जन्म हुआ है। इन शासकीय कर्मचारियों की संतान का जन्म 2001 के बाद का है, जो नीति के साफ उल्लंघन में आता है।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात है की सरकार और प्रशासन की चुप्पी।

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