धर्म और मर्यादा की शिक्षा देती कथा, अहंकार के अंत का स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने दिया संदेश
लालगंज, मीरजापुर। स्थानीय विकासखंड क्षेत्र के गंगहरा कलां गांव में चल रही शिव शक्ति महायज्ञ एवं शिव पुराण कथा के सातवें दिन शुक्रवार को काशी धर्म पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि संसार में जब-जब अहंकार बढ़ता है तब-तब उसका अंत निश्चित होता है। कथा में तारकासुर वध और भगवान गणेश के प्राकट्य का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया।
उन्होंने बताया कि तारकासुर ने कठोर तप कर यह वरदान प्राप्त किया कि उसका अंत केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव है। वरदान मिलने के बाद उसने देवताओं और ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।जिससे तीनों लोकों में अशांति फैल गई।कथा में आगे बताया गया कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने देवताओं का नेतृत्व संभाला और तारकासुर से युद्ध किया। लंबे संघर्ष के बाद उसका अंत हुआ और देवताओं को भय से मुक्ति मिली।इसके बाद भगवान गणेश के जन्म का प्रसंग सुनाया गया। माता पार्वती ने अपने स्नेह से गणेश को उत्पन्न किया और उन्हें द्वार पर पहरा देने का दायित्व सौंपा। गणेश ने इसे पूर्ण निष्ठा के साथ निभाया।कथा के अनुसार जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। इस पर विवाद की स्थिति बनी और भगवान शिव ने उनका मस्तक अलग कर दिया। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर गणेश को पुनर्जीवित किया गया और हाथी का मस्तक लगाकर उन्हें नया स्वरूप दिया गया। शंकराचार्य ने कहा कि इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि अहंकार कभी स्थायी नहीं रहता जबकि कर्तव्य और निष्ठा से व्यक्ति सम्मान प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश को प्रथम पूज्य का स्थान इसी कारण प्राप्त हुआ। कथा के समापन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार दुबे, जगत नारायण दुबे, डा०गोविन्द दुबे, प्रहलाद दुबे, रामजतन दुबे, अमरेश चंद्र दुबे, रामगोपाल दुबे, भीम दुबे, सुशील दुबे, ब्रह्मानंद दुबे, कामेश्वर दुबे, पशुपतिनाथ चौबे, कुन्दन पाण्डेय, उमेश कुमार पांडेय, मार्कंडेय पांडेय, उपेंद्र पांडे, जितेंद्र पांडे, शशि प्रकाश चौबे, लक्ष्मण पांडेय, शैलेंद्र पांडेय, बलिराम दुबे, जगत नारायण, शंकर पाण्डेय, संजय श्रीवास्तव, जीत नारायण दुबे के अलावा भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






