खाकी के घेरे में ‘खसरा’: जबलपुर में बिना आवेदन ही चढ़ गए जमीनों पर नाम, अधिवक्ता ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप!
जबलपुर के तहसील कार्यालयों में ‘जादूई’ तरीके से राजस्व रिकॉर्ड (खसरा) बदलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अधिवक्ता दीपांशु साहू ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि आधारताल तहसील में ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, जहाँ नामांतरण के आवेदन या तो खारिज हो चुके थे या कभी दर्ज ही नहीं किए गए, फिर भी खसरे में रातों-रात आवेदकों के नाम चढ़ा दिए गए। अधिवक्ता के अनुसार, एक मामले (प्रकरण क्रमांक 1687/A6/2021-22) में तहसीलदार द्वारा दस्तावेज न होने के कारण नामांतरण खारिज कर दिया गया था, लेकिन रिकॉर्ड में नाम फिर भी अपडेट हो गया। इससे भी अधिक चौंकाने वाला मामला वह है जिसमें कोई प्रकरण दर्ज ही नहीं हुआ, फिर भी सरकारी तंत्र की मिलीभगत से निजी जमीनों के मालिकाना हक में हेरफेर कर दी गई।
अधिवक्ता दीपांशु साहू ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘संगठित भ्रष्टाचार’ करार देते हुए जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वे पिछले एक-डेढ़ साल से कलेक्टर और एसडीएम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासनों का झुनझुना थमाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर कलेक्टर ने छह महीने पहले एफआईआर (FIR) दर्ज करने की बात कही थी, जो आज तक ठंडे बस्ते में है। अधिवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि जब ऑन-रिकॉर्ड फर्जीवाड़ा साफ दिख रहा है, तो आखिर जिला प्रशासन किस दबाव में दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है? यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे राजस्व विभाग की शुचिता पर गहरे प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
वाइड. एडवोकेट दीपांशु साहू
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट






