महाराष्ट्रीयन परिवारों में मायके आई महालक्ष्मी
तीन दिनों तक बेटी की तरह होगा ज्येष्ठा-कनिष्ठा गौरी का सत्कार, आज महापूजा और 16 व्यंजनों का भोग
देवास।
महाराष्ट्रियन परिवारों में गुरुवार से महालक्ष्मी पर्व शुरू हुआ। ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी यानी महालक्ष्मी तीन दिनों के लिए मायके आती हैं। मराठी परिवारों में उनका बेटी की तरह स्वागत और सत्कार किया जाता है। आज 17 सितंबर गुरुवार को गौरी का आह्वान किया गया। 18 सितंबर को महापूजा होगी और 19 सितंबर को महाआरती के बाद विदाई दी जाएगी।
महालक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के प्रवेश द्वार से पूजा स्थल तक हल्दी-कुंकू के पदचिह्न बनाए जाते हैं। ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है। महालक्ष्मी को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
शुक्रवार को महापूजा के साथ पूरणपोली सहित 16 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। सुहागिन महिलाओं और ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है।
समाज से जुड़ी राखी अमित बागलीकर ने बताया कि मराठी परिवारों में महालक्ष्मी को बेटी का स्वरूप मानकर तीन दिनों तक उनका लाड़-सत्कार किया जाता है। शनिवार को महाआरती के बाद उन्हें विधि-विधान से विदाई देकर अगले वर्ष फिर आने का न्योता दिया जाएगा।






