देवास~ में गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में गणपति बप्पा की स्थापना के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। वहीं, गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में कोलकाता से आए कलाकार दिन-रात जुटे हुए हैं। देवास में इस बार 700 से अधिक पंडालों में गणपति बप्पा विराजमान होने की संभावना है।
मां चामुंडा की नगरी देवास को देवताओं का वास माना जाता है, इसी वजह से शहर का नाम देवास पड़ा। गणेश उत्सव को लेकर शहर में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। देवास में गणेश जी की आकर्षक मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इन प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के लिए कोलकाता से 30 से अधिक कलाकार देवास पहुंचे हैं। कलाकार पिछले कई महीनों से गणेश जी की प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हुए हैं। मूर्तियों को बनाने में घास, लकड़ी, बांस और मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिमाओं के लिए विशेष मिट्टी कानपुर से मंगाई जाती है। कलाकारों के मुताबिक प्रतिमा को तैयार करने में करीब चार से पांच महीने तक का समय लग जाता है। कोलकाता के कलाकारों द्वारा तैयार की जा रही मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बेहद सुंदर और आकर्षक हैं। इन प्रतिमाओं को खरीदने के लिए देवास ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग पहुंच रहे हैं।
मूर्ति कलाकार मूर्ति बनाने की प्रक्रिया, समय और इस बार की विशेष प्रतिमाओं को लेकर जानकारी।
मूर्ति खरीदने आए श्रद्धालु गणेश जी की प्रतिमा की खासियत और खरीदारी को लेकर प्रतिक्रिया।
देवास में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच कोलकाता के कलाकारों की बनाई मिट्टी की प्रतिमाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ती नजर आ रही है






