धान बोनस को लेकर गोंदिया में बवाल, आंदोलनकारी हिरासत में

धान बोनस नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश, पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन की कोशिश आंदोलन से पहले प्रहार कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में बोनस मिलने तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी

गोंदिया जिले में धान बोनस को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
धान का जिला कहे जाने वाले गोंदिया में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को धान का बोनस नहीं मिलने का आरोप है।

किसानों की इस समस्या को लेकर प्रहार संगठन ने पहले जिलाधिकारी कार्यालय पर ट्रैक्टर मोर्चा निकाला था। इसके बाद संगठन ने 9 सितंबर को जिलेभर में पानी की टंकियों पर चढ़कर आंदोलन करने की चेतावनी दी थी।

इसी क्रम में आंदोलन की तैयारी कर रहे प्रहार संगठन के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पानी की टंकी पर चढ़ने से पहले ही हिरासत में लेकर आंदोलन रोक दिया।

गोंदिया जिले को धान उत्पादन के लिए जाना जाता है। जिले के हजारों किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। किसानों का आरोप है कि धान का बोनस अब तक नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर प्रहार संगठन ने किसानों की आवाज उठाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक ट्रैक्टर मोर्चा निकाला था। इसके बाद संगठन की ओर से 9 सितंबर को पानी की टंकियों पर चढ़कर आंदोलन करने का ऐलान किया गया था।

बुधवार को आंदोलन के दौरान प्रहार संगठन के कार्यकर्ता पानी की टंकी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं को टंकी पर चढ़ने से पहले ही हिरासत में ले लिया और आंदोलन को रोक दिया।

आंदोलन के दौरान प्रहार जिलाध्यक्ष जितेंद्र उर्फ पिंटू बावनकर, वीरेंद्र बिसेन, रोहित बघेले, चंद्रकांत बडवाई, दीपक भोयर और अजय अटक सहित संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

वहीं सालेकसा तहसील क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में किसान आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इनमें किसान रघुनाथ चुटे और सुनील गिरडकर सहित अन्य किसान शामिल रहे।

आंदोलन में शामिल किसानों और प्रहार कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसानों के न्याय और हक की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। जब तक किसानों को उनका धान बोनस नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी गई है।

बाइट के लिए

प्रहार जिलाध्यक्ष जितेंद्र (पिंटू) बावनकर
आंदोलन में शामिल किसान

फिलहाल पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर आंदोलन रोक दिया गया है। लेकिन धान बोनस का मुद्दा एक बार फिर गोंदिया जिले में गरमा गया है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन किसानों की इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।

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