आईसीयू जाने का रैंप बंद, लिखा-असुविधा के लिए खेद है : जर्जर जिला अस्पताल : 2021 में ही एनएचएम सिविल विंग ने नॉन रिपेयरेबल बताया था, अब छत क्षतिग्रस्त, प्लास्टर गिर रहा है।
जिला अस्पताल इतना जर्जर हो चुका है कि मानो उसे खुद आईसीयू की जरूरत हो। इस सीजन की बारिश में पहले ही ऑपरेशन थियेटर के पास हिस्सा गिर चुका है जिससे, ओटी की एक तरफ की छत दब गई थी। ऐसे में वहां ताला लगाया जा चुका है। अब अस्पताल के फर्स्ट फ्लोर पर आईसीयू वार्ड तक मरीजों को ले जाने का रैंप बंद करना पड़ गया है। अस्पताल प्रशासन को पर्ची लगाकर लिखा पड़ा कि-असुविधा के लिए खेद है, ICU की छत क्षतिग्रस्त है, ऊपर से प्लास्टर गिर रहा है, आगामी आदेश तक रास्ता बंद रहेगा। जिला अस्पताल का भवन का करीब 70 फीसदी जर्जर हो चुका है। इसका भवन 1980 में बना था। वर्ष 2021 में ही एनएचएम की सिविल विंग ने इसे नॉन रिपेयरेबल बताया था। ऐसे में इसे तोड़ने और री-कंस्ट्रक्शन के लिए पत्राचार भी हुआ था।
मरीज स्ट्रेचर से आईसीयूतक कैसे जाएगा?
जिला अस्पताल के फर्स्ट फ्लोर पर आईसीयू के अलावा, क्रिटिकल केयर यूनिट, टेली मेडिसिन, आयुर्वेद, होम्योपैथिक और मेल सर्जिकल वार्ड भी है। यहां तक जाने के लिए एक तरफ रैंप बना हुआ है और दूसरी तरफ सीढ़ियां है। रैंप वाले हिस्से के छत का प्लास्टर अब गिरने लगा है और छत के सरिये तक दिखने लगे हैं। गंभीर मरीज को अगर स्ट्रेचर से आईसूयी, सर्जिकल वार्ड या सीसीयू तक ले जाना हो तो दूसरा रास्ता ही नहीं है।
फिलहाल भवन को तोड़ने से पहले शिफ्टिंग के इंतजाम करने पड़ेंगे। ऐसे में एमसीएच के पास सीसीयू यूनिट बन रही है। रैंप वाले हिस्से को बंद इसलिए किया है कि लोग यहां से आते-जाते रहते है और कोई हिस्सा गिर जाए तो हादसा न हो। हालांकि गंभीर मरीज को आईसीयू या दूसरे वार्ड में ले जाने वाली स्थिति में खोलकर ध्यान से ले जाने की व्यवस्था करेंगे।






