प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने किया। उन्होंने सरकार पर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम किसानों का संरक्षण करना है, लेकिन आज किसानों का केवल शोषण किया जा रहा है। किसान अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
किसानों ने कहा कि यदि विंध्य एक्सप्रेस-वे का निर्माण वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार हुआ तो बड़ी संख्या में किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
किसान बबलू कुमार ने कहा, “जान भले चली जाए, लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं देंगे। एक्सप्रेस-वे बनने से किसानों को भारी नुकसान होगा और हम अंतिम दम तक इसका विरोध करेंगे।”
रुपेश दूबे ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पुश्तैनी जमीन ही किसानों की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बचाने के लिए आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
किसान रामसिंह पटेल पूर्व प्रधान शकील अहमद ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उनका कहना था कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेना न्यायसंगत नहीं है और सरकार को किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
संदीप मिश्रा ने हुंकार भरते हुए कहा कि “जब तक किसानों की जमीनी और अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार किसानों की आवाज दबाने की बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करे। किसान झुकने वाले नहीं हैं और अपने हक की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लगातार लड़ेंगे।”
“जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे” — विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में किसानों का उग्र प्रदर्शन, सरकार पर शोषण का आरोप
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में प्रयागराज से बनने वाले विंध्य एक्सप्रेस वे का विरोध दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है
22 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले 330किमी लंबे एक्सप्रेस वे में कृषि योग्य भूमि जाने से किसान काफी नाराज है शुक्रवार को
घोरावल विधानसभा क्षेत्र के बनौरा गांव में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने का संकल्प दोहराया।
प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने किया। उन्होंने सरकार पर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम किसानों का संरक्षण करना है, लेकिन आज किसानों का केवल शोषण किया जा रहा है। किसान अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
किसानों ने कहा कि यदि विंध्य एक्सप्रेस-वे का निर्माण वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार हुआ तो बड़ी संख्या में किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
किसान बबलू कुमार ने कहा, “जान भले चली जाए, लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं देंगे। एक्सप्रेस-वे बनने से किसानों को भारी नुकसान होगा और हम अंतिम दम तक इसका विरोध करेंगे।”
रुपेश दूबे ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पुश्तैनी जमीन ही किसानों की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बचाने के लिए आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
किसान रामसिंह पटेल पूर्व प्रधान शकील अहमद ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उनका कहना था कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेना न्यायसंगत नहीं है और सरकार को किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
संदीप मिश्रा ने हुंकार भरते हुए कहा कि “जब तक किसानों की जमीनी और अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार किसानों की आवाज दबाने की बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करे। किसान झुकने वाले नहीं हैं और अपने हक की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लगातार लड़ेंगे।”






