जालोर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना, 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन

जालोर में सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताः बोलीं- गैर-विभागीय काम करवा रहे, हमारे हक का पैसा भी बकाया; आंदोलन करेंगे।

मानदेय बढ़ाने सहित अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार को आंगनबाड़ी महिला कार्मिकों ने जालोर जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। मांगें पूरी न होने पर कार्यकर्ताओं ने आज से कलेक्ट्रेट के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। सुबह करीब 10 बजे से ही जिलेभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कलेक्ट्रेट के बाहर जुटना शुरू हो गई थीं। इस दौरान महिला कार्मिकों ने अपनी मांगों के समर्थन में और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि यदि शाम तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह धरना पूरी तरह अनिश्चितकालीन रहेगा।

‘पड़ोसी राज्य में ज्यादा मानदेय, राजस्थान में हक का पैसा भी बकाया’

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जशोदा ने कहा कि एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार अपने आंगनबाड़ी कार्मिकों को 13 से 15 हजार रुपए तक मानदेय दे रही है, वहीं राजस्थान में महज 6 से 10 हजार रुपए का अल्प मानदेय दिया जा रहा है। यह मामूली मानदेय भी पिछले लंबे समय से बकाया चल रहा है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

11 सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्मिकों को नियमित कर्मचारी बनाने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक कोर्ट के निर्णयानुसार न्यूनतम मजदूरी 20,000 से 25,000 रुपए प्रति माह किए जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग में ठेका प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही कुम्हेर परियोजना के ठेका कार्यकाल की ऑडिट कराई जाए।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जनगणना, सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-विभागीय कार्य करवाना तुरंत बंद किया जाए। नैपकिन का ऑफलाइन वितरण ही कार्मिकों से कराया जाए। बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्मिकों को ग्रेच्युटी भुगतान करने का ऐलान किया गया था, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। सरकार तुरंत यह यादेश जारी करे।

जेब से भर रहे भवन का किराया

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज के दौर में भी ग्रामीण इलाकों में 200 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 750 रुपए भवन किराया दिया जा रहा है, जो बेहद कम है। केंद्र सरकार के 1,000 से 4,000 रुपए तक के प्रावधान के बावजूद कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से किराया भरना पड़ रहा है, जिसे सुधारा जाए। सेवानिवृत्ति के समय कार्मिकों को एकमुश्त 10 लाख रुपए नकद मिलने चाहिए, जो उनके मानदेय राशि के 50% से कम न हो। सेवानिवृत्त हो चुके मानदेय कार्मिकों को उनकी सामूहिक बीमा योजना की राशि का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। 3 से 6 साल तक के छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि 30 जून तक बढ़ाई जाए। कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार लिखित में उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, वे कलेक्ट्रेट के सामने से नहीं हटेंगी और आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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