जबलपुर में मुहर्रम की 7वीं तारीख पर शहर की अनेक सवारियां छोटी बजरिया, काजी मोहल्ला और मुजावर मोहल्ला होते हुए मदन महल दरगाह शरीफ पहुंचीं, जहां पारंपरिक सलामी पेश की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे और ‘या अली’ व ‘या हुसैन’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। दरगाह परिसर में श्रद्धा, आस्था और अकीदत का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सलामी समारोह के दौरान अकीदतमंदों ने दरगाह में हाजिरी देकर अपनी मुरादें मांगीं और मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआएं कीं। गढ़ा का यह ऐतिहासिक आयोजन मोहब्बत, कौमी एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक माना जाता है, जो वर्षों से सभी समुदायों को एक सूत्र में बांधते हुए जबलपुर की अलग पहचान को कायम रखे हुए है।






