कोयला मार्ग निर्माण पर भड़के ग्रामीण, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

सिंगरौली जिले से इस वक्त की बड़ी खबर, जहाँ कोयला परिवहन मार्ग निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रभावित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए निजी कंपनियों पर नियमों की अनदेखी और किसानों की जमीनों पर जबरन कार्य कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंगरौली क्षेत्र में कोयला परिवहन के लिए बनाए जा रहे सड़कों और मार्गों का निर्माण कार्य कई स्थानों पर तेजी से चल रहा है, लेकिन इन कार्यों में शासन की आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। ज्ञापन में विशेष रूप से मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 247 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बिना वैध अनुमति और बिना प्रभावित परिवारों की सहमति के निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिन किसानों और परिवारों की भूमि इस परियोजना से प्रभावित हो रही है, उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं, कई प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और पुनर्स्थापन की कोई स्पष्ट व्यवस्था भी नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनियाँ प्रशासनिक दबाव और प्रभाव का उपयोग कर निर्माण कार्य को आगे बढ़ा रही हैं, जिससे क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि कानून के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन, प्रभावित लोगों की सहमति और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों की अनदेखी हो रही है।
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
▪️ धारा 247 के अंतर्गत दी गई सभी अनुमतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
▪️ जिन किसानों और ग्रामीणों की भूमि प्रभावित हुई है, उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।
▪️ जब तक सभी वैधानिक प्रक्रियाएँ पूरी नहीं हो जातीं, तब तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
▪️ और यदि कंपनियाँ नियमों का उल्लंघन करती पाई जाएँ तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित कंपनियों की होगी।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस ज्ञापन के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल जरूर तेज हो गई है।

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