टनल बनी, तालाब मिटा: स्लीमनाबाद का ऐतिहासिक जलस्रोत बहाली की राह ताक रहा

कटनी स्लीमनाबाद बरगी नहर परियोजना की स्लीमनाबाद टनल तालाब के नीचे से कब की बनकर तैयार हो गई, लेकिन जिस तालाब को “काम पूरा होते ही यथास्थिति में लाने” की शर्त पर पाटा गया था, वह आज भी मिट्टी के ढेर में तब्दील है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद तिराहे का यह इकलौता ऐतिहासिक तालाब न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि भीषण गर्मी में पशुधन की प्यास बुझाने का आखिरी सहारा भी। टनल का तालाब के नीचे काम खत्म हुए महीनों बीत गया, मगर नर्मदा विकास विभाग ने शर्त पूरी नहीं की। अब गर्मी दस्तक दे चुकी है और सवाल खड़ा है: स्लीमनाबाद को उसका तालाब कब लौटेगा?

क्या है पूरा मामला:

अनुमति की शर्त थी साफ: काम के बाद तालाब लौटाना होगा

नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 5, कटनी के कार्यपालन यंत्री ने स्लीमनाबाद टनल निर्माण के लिए खसरा नंबर 659, यानी ऐतिहासिक स्लीमनाबाद तालाब को अस्थायी रूप से मिट्टी से भरने की अनुमति मांगी थी। प्रशासन ने अनुमति देते हुए स्पष्ट किया था कि “तालाब के नीचे से टनल का कार्य पूर्ण होने के पश्चात तालाब को यथा स्थिति लाना अनिवार्य होगा”। दस्तावेजों में यह शर्त दर्ज है।

टनल बन गई, तालाब गयाब

स्थानीय सूत्रों और विभागीय पुष्टि के अनुसार स्लीमनाबाद टनल तालाब के नीचे का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो चुका है। एनवीडीए के अधिकारियों ने भी संपर्क करने पर माना कि तालाब के नीचे से टनल का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके बावजूद मौके पर आज भी मिट्टी का ढेर ही है। तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम, खुदाई या बहाली का काम शुरू नहीं किया गया।

सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, आस्था और जीवन का आधार था

यह तालाब स्लीमनाबाद तिराहे का इकलौता बारहमासी जलस्रोत था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, “गर्मी में जब सारे हैंडपंप जवाब दे देते थे, तब भी इस तालाब में पर्याप्त पानी रहता था”। गाय-भैंस समेत आसपास के दर्जनों गांवों के पशु यहीं पानी पीते थे।

धार्मिक महत्व भी कम नहीं था। गणेश विसर्जन, छठ पूजा, तीज-त्योहारों के अनुष्ठान और कई अन्य रीति-रिवाज इसी तालाब में संपन्न होते थे। तालाब के खत्म होने से सांस्कृतिक परंपराएं टूट रही हैं।

विभाग पर सवाल: अनुमति का उल्लंघन, हीलाहवाली संदिग्ध

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग ने शर्त मानकर अनुमति तो ले ली, मगर शर्त पूरी नहीं की। “यह सीधे-सीधे अनुमति का उल्लंघन है। स्लीमनाबाद तिराहे का यह इकलौता तालाब था। इसे यथास्थिति में लाना विभाग की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।”

एनवीडीए के अधिकारियों द्वारा तालाब यथास्थिति में लाने को लेकर की जा रही हीलाहवाली अपने आप में संदेह पैदा करती है। जब अधिकारी खुद मान रहे हैं कि टनल का काम पूरा है, तो तालाब की बहाली में देरी क्यों?

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