संदीप मौर्य✍️
कटनी। जिले में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग रोकने के लिए आबकारी विभाग ने बड़े-बड़े दावे किए थे। दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा करने और QR कोड लगाने के निर्देश जारी किए गए थे ताकि ग्राहक निर्धारित दर पर शराब खरीद सकें। लेकिन जमीनी हकीकत विभाग के दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
सूत्रों और ग्राहकों की शिकायतों के अनुसार जिले की अधिकांश शराब दुकानों पर आज भी निर्धारित दर से 30 से 50 रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। विभाग द्वारा लगाए गए QR कोड केवल दिखावे तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि दुकानदार खुलेआम मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।
आबकारी विभाग ने ओवररेटिंग पर सख्त कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन तक की चेतावनी दी थी, लेकिन अब तक किसी बड़ी कार्रवाई के सामने नहीं आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जिले की शराब दुकानों पर लगाए गए रेट बोर्ड भी कई स्थानों पर केवल औपचारिकता साबित हो रहे हैं। निर्धारित एमआरपी और वास्तविक बिक्री दर में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इससे स्पष्ट है कि न तो दुकानदारों में कार्रवाई का डर है और न ही विभागीय निगरानी का प्रभाव दिखाई दे रहा है।
प्रश्न यह है कि जब विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो फिर ओवररेटिंग पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? आखिर कब तक शराब ठेकेदारों की मनमानी चलती रहेगी और कब उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिलेगी?
जनता अब आबकारी विभाग से केवल आदेश जारी करने की नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रही है, ताकि शराब की बिक्री निर्धारित दरों पर सुनिश्चित हो सके और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाई जा सके।






