टनल बनी, तालाब गायब—स्लीमनाबाद में जलस्रोत बहाली का इंतजार

बरगी नहर परियोजना के बाद भी यथास्थिति को तरस रहा स्लीमनाबाद का इकलौता तालाब, धार्मिक आस्था और पशुधन पर संकट

स्लीमनाबाद, कटनी | 17 अप्रैल 2026
बरगी नहर परियोजना के अंतर्गत स्लीमनाबाद टनल निर्माण के लिए अस्थायी रूप से मिट्टी से पाटे गए ऐतिहासिक स्लीमनाबाद तालाब को आज तक उसकी मूल स्थिति में नहीं लाया गया है। यह तालाब स्लीमनाबाद तिराहे का इकलौता जलस्रोत था, जिससे न केवल धार्मिक रीति-रिवाज जुड़े थे, बल्कि भीषण गर्मी में पशुओं के पीने के पानी का भी एकमात्र सहारा था।

क्या थी अनुमति की शर्त
कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 5, कटनी द्वारा टनल निर्माण हेतु तालाब के एलाइनमेंट में आने के कारण खसरा नंबर 659, यानी स्लीमनाबाद तालाब को मिट्टी से भरने की अनुमति मांगी गई थी। प्रशासन ने यह अनुमति स्पष्ट शर्त पर दी थी कि टनल का कार्य पूर्ण होने के पश्चात तालाब को अनिवार्य रूप से यथास्थिति में लाया जाएगा। स्थानीय दस्तावेजों के अनुसार, आदेश में उल्लेख था कि “तालाब के नीचे से टनल का कार्य पूर्ण होने के पश्चात तालाब को यथा स्थिति लाना अनिवार्य होगा”।

टनल बनी, तालाब गायब

सूत्रों के मुताबिक स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो चुका है। बावजूद इसके, नर्मदा विकास विभाग द्वारा तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। तालाब की जगह अब भी मिट्टी का ढेर मौजूद है।

सांस्कृतिक और व्यवहारिक नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं था। गणेश विसर्जन, छठ पूजा, तीज-त्योहारों के अनुष्ठान और अन्य धार्मिक रीति-रिवाज इसी तालाब में संपन्न होते थे। इसके अलावा, यह तालाब बारहमासी था। “गर्मी में जब सारे हैंडपंप जवाब दे देते थे, तब भी इस तालाब में पर्याप्त पानी रहता था। गाय-भैंस से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों के पशु यहीं पानी पीते थे।

प्रशासन से जवाबदेही की मांग

क्षेत्र के लोगों में रोष है कि विभाग ने शर्त मानकर अनुमति तो ले ली, मगर शर्त पूरी नहीं की। “यह सीधे-सीधे अनुमति का उल्लंघन है। स्लीमनाबाद तिराहे का यह इकलौता तालाब था। इसे यथास्थिति में लाना विभाग की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।”

बड़ा सवाल: कब लौटेगी यथास्थिति
टनल निर्माण पूरा होने के बाद भी तालाब का अस्तित्व मिट्टी के नीचे दबा है। गर्मी ने दस्तक दे दी है और पशुधन के लिए पानी का संकट गहराने लगा है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जिस शर्त पर तालाब को पाटने की अनुमति दी गई थी, नर्मदा विकास विभाग उस शर्त को कब पूरा करेगा और स्लीमनाबाद को उसका इकलौता तालाब कब वापस मिलेगा।

इस संबंध में नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 5 के
अधिकारियों से संपर्क करने पर बताया गया, की तालाब के नीचे से टनल का कार्य पूर्ण हो चुका है जल्द ही तालाब को यथा स्थिति में लाया जाएगा

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