कटनी बाल ट्रांजिट केस: 167 से 163 हुए बच्चे, मामला जीआरपी के हवाले

कटनी में 167 से 163 हुए मासूम….अब मामला जीआरपी के हवाले कटनी बाल ट्रांजिट केस में साजिश के संकेत गहराए कटनी रेलवे स्टेशन पर पटना-पुणे एक्सप्रेस से बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों के रेस्क्यू का मामला अब नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद अब यह पूरा मामला जीआरपी को सौंप दिया गया है, जिसने इसे आपराधिक प्रकरण के रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बाल कल्याण समिति जिला कटनी के सदस्य दुर्गेश की शिकायत के आधार पर जीआरपी ने अपराध क्रमांक 340/2026 के तहत धारा 142, 143(4) BNS में मामला दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही अब जांच औपचारिक रूप से आपराधिक एंगल से आगे बढ़ रही है। पहले जहां 167 बच्चों को रेस्क्यू किए जाने की बात सामने आई थी, वहीं अब आधिकारिक रूप से 163 नाबालिग बच्चों की पुष्टि की गई है। बाकी बच्चों के संबंध में जानकारी स्पष्ट की जा रही है, जिससे पूरे घटनाक्रम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 8 लोगों की भूमिका संदिग्ध—कोच-कोच में फैला नेटवर्क ताजा जांच में एक अहम खुलासा सामने आया है— बताया जा रहा है कि 8 वयस्क व्यक्तियों ने बच्चों को ट्रेन के अलग-अलग कोचों में बांटकर बैठाया था, जिससे वे एक साथ नजर न आएं। यह तरीका आमतौर पर संगठित ट्रांजिट या संदिग्ध गतिविधियों में अपनाया जाता है, जिससे अब पूरे मामले में योजनाबद्ध साजिश की आशंका और गहरी हो गई है। जांच में यह बात सामने आई है कि बच्चों को पटना (बिहार) से लातूर (महाराष्ट्र) ले जाया जा रहा था। हालांकि, कुछ दस्तावेज मिलने की बात कही जा रही है, जिनके आधार पर बच्चों के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। लेकिन अभी भी कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं क्या परिजनों की सहमति विधिवत ली गई थी,क्या इतने बड़े समूह को स्थानांतरित करने की वैधानिक अनुमति थी, बच्चों को अलग-अलग कोचों में क्यों बैठाया गया, जीआरपी और बाल संरक्षण टीम द्वारा सभी बच्चों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। उनकी काउंसलिंग के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें इस यात्रा के बारे में क्या जानकारी थी और वे किन परिस्थितियों में साथ आए। इस पूरे मामले को लेकर मुस्लिम समाज के मारूफ अहमद हनफी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटनाक्रम को योजनाबद्ध और समाज के लिए गलत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। जीआरपी की एंट्री के बाद अब यह मामला केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संभावित नेटवर्क, संगठित ट्रांजिट और मानव तस्करी जैसे एंगल पर गहराई से जांच की जा रही है। यह मामला अब और उलझता जा रहा है। संख्या में बदलाव, कोचों में बिखराव और अब एफआईआर दर्ज होने के बाद यह स्पष्ट है कि यह सिर्फ बच्चों की यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐसे घटनाक्रम की परतें हैं, जिनमें सच्चाई अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है

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