फतेहपुर यूपी की तहसील बिन्दकी के औंग कस्बे में नेशनल हाईवे के किनारे और पुल के नीचे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रशासन और हाईवे की टीम द्वारा छठवीं बार अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन कार्रवाई के महज 12 घंटे बाद ही स्थिति जस की तस हो गई। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों में कार्रवाई का कोई खौफ नहीं रह गया है।अस्थायी अतिक्रमण करने वाले ठेले और दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें बार-बार हटाकर परेशान किया जा रहा है, जबकि नाले की करीब तीन मीटर जमीन पर किए गए स्थायी अतिक्रमण को हटाने में जिम्मेदार विभाग कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक स्थायी कब्जों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पुल के नीचे और सड़क किनारे अस्थायी अतिक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता ।बताया जाता है कि नेशनल हाईवे के रोड-ऑफ-वे की सीमा औंग कस्बे में 25-25 मीटर निर्धारित है। इस सीमा के भीतर बने कई मकानों और दुकानों का मुआवजा भी दिया जा चुका है, इसके बावजूद संबंधित जमीन को अभी तक खाली नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मुआवजा दिया जा चुका है तो जमीन को कब्जामुक्त कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग की है।स्थानीय लोगों के मुताबिक स्थायी अवैध कब्जों पर प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण ही पुल के नीचे अस्थायी अतिक्रमण बार-बार पनप जाता है। कार्रवाई के नाम पर ठेले हटाए जाते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वही जगह फिर कब्जे में आ जाती है।अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि हाईवे की जमीन का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है तो उसे अब तक खाली क्यों नहीं कराया गया? आखिर स्थायी अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी ? लगातार छठवीं बार अतिक्रमण हटने और 12 घंटे बाद फिर बहाल होने की स्थिति ने पुलिस प्रशासन और हाईवे प्रशासन की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं ।






