बीते 8 जुलाई को media ने खबर दिखाई थी कि कैसे पीने के पानी की पाइपलाइन नालों से होकर गुजर रही थी। इस मामले को अब नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) नें गंभीरता से लेते हुए सख्ती दिखाई है। जिला प्रशासन और नगर निगम जबलपुर पर नाराजगी दिखाते हुए निर्देश दिए है कि स्थल निरीक्षण करे। एनजीटी ने यह भी कहा कि आदेश के बावजूद भी टीम ने मौके पर जाकर जांच करने की जहमत नही उठाई। प्रशासन के कार्रवाई ना करने के बाद एनजीटी ने नोडल एजेंसी गठित की, जिन्होंने जांच के बाद जवाब दिया कि स्थल निरीक्षण के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम सहयोग नहीं कर रहा है।
नोडल एजेंसी की जांच के बाद एनजीटी ने अधिकारियों के लापरवाही करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश दिए है कि गठित टीम के साथ मौके पर जाकर स्थल निरीक्षण किया जाए और 2 सप्ताह मे रिपोर्ट पेश करे। जांच के दौरान यह भी पता चला कि जबलपुर शहर में 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालियों से गुजर रहे है, और 47 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है।
नागरिक उपभोक्ता मंच के डा पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव के द्रारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन से एक माह में रिपोर्ट मांगी गई थी, पर प्रशासन ने एनजीटी के आदेश पर ध्यान नहीं दिया।
10 जुलाई 2026 को जब एनजीटी में सुनवाई हुई तो नोडल एजेंसी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिकायत में बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन जबलपुर के असहयोग के कारण स्थल निरीक्षण नहीं हो पाया है। विभिन्न विभागों में आपसी तालमेल नहीं है।
सुनवाई के बाद एनजीटी जस्टिस दिनेश कुमार सिंह तथा एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार ने इस असहयोग को भारी अपत्तिजनक बताया। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त निर्देश दिए कि 2 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करे, यह अंतिम अवसह होगा।
जस्टिस दिनेश कुमार ने एनजीटी के रजिस्ट्री को निर्देश दिए है कि तत्काल जबलपुर कलेक्टर तथा नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर बताएं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ स्थल पर जाकर निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सहयोग करें।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रभात यादव ने एनजीटी को बताया कि पाइफ लाइन 40 से 50 साल पुरानी है। जो कि क्षतिग्रस्त हो चुकी है, लेकिन उन्हें बदलने या ठीक करने का प्रयास नहीं किया गया है। डीपीआर भी नहीं बना।
बता दे कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में रहने वाले लोगों के घरों में नलों से काला और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की तत्काल जांच और समाधान की मांग की थी।
कुछ दिनों पहले जब घरों में काला पानी आया तो लोगों ने सोचा कि बारिश के कारण कुछ देर बाद पानी साफ हो जाएगा, लेकिन 10 से 15 मिनट तक लगातार दूषित पानी आने के बाद लोगों ने आसपास की पाइपलाइन की जांच की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर से गुजर रही है, जिससे लीकेज या अन्य कारणों से नाले का गंदा पानी पेयजल में मिलकर घरों तक पहुंच रहा है।





