R.T.I. में नहीं मिला सीधा जवाब, टनल पूर्ण होने की जानकारी पर पर्दा? स्लीमनाबाद के ऐतिहासिक तालाब की बहाली पर उठे सवाल


संदीप मौर्य✍️

कटनी/स्लीमनाबाद।
नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-5, कटनी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत करीब एक माह पूर्व मांगी गई जानकारी का स्पष्ट उत्तर अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। आवेदन में पूछा गया था कि स्लीमनाबाद तिराहा स्थित खसरा क्रमांक 659 के नीचे निर्मित बरगी नहर परियोजना की टनल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है अथवा नहीं।
आवेदक का आरोप है कि प्रथम लोक सूचना अधिकारी सहज श्रीवास्तव द्वारा निर्धारित समय सीमा में स्पष्ट सूचना उपलब्ध कराने के बजाय गोलमोल जवाब दिया गया। उत्तर में आईपीओ (इंडियन पोस्टल ऑर्डर) को मान्य न मानने तथा मांगी गई जानकारी को व्यक्तिगत प्रकृति की बताकर सूचना देने से इनकार करने जैसी बातें कही गईं, जबकि आवेदक का कहना है कि यह सूचना किसी व्यक्ति से संबंधित नहीं बल्कि एक सार्वजनिक परियोजना और सरकारी कार्य से जुड़ी है, जिस पर आम नागरिकों को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
तालाब की बहाली का सवाल फिर चर्चा में
मामला केवल आरटीआई तक सीमित नहीं है। स्लीमनाबाद तिराहा स्थित ऐतिहासिक तालाब को बरगी नहर परियोजना की टनल निर्माण के लिए अस्थायी रूप से मिट्टी से भरने की अनुमति प्रशासन द्वारा इस स्पष्ट शर्त के साथ दी गई थी कि टनल का कार्य पूर्ण होने के बाद तालाब को पूर्व स्थिति (यथास्थिति) में बहाल करना अनिवार्य होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो चुका है। विभागीय अधिकारियों ने भी अनौपचारिक बातचीत में टनल का कार्य पूर्ण होने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद आज तक तालाब की खुदाई एवं पुनर्स्थापना का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। मौके पर आज भी तालाब की जगह मिट्टी का विशाल ढेर दिखाई देता है।
जल स्रोत और आस्था का केंद्र था तालाब
स्लीमनाबाद तिराहे का यह तालाब वर्षों से क्षेत्र का प्रमुख बारहमासी जलस्रोत रहा है। गर्मी के मौसम में आसपास के गांवों के पशुओं के लिए यही मुख्य जल स्रोत था। इसके अलावा गणेश विसर्जन, छठ पूजा, तीज-त्योहार तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी इसी तालाब में होता रहा है। तालाब समाप्त होने से स्थानीय लोगों की धार्मिक एवं सामाजिक परंपराएं भी प्रभावित हुई हैं।
आरटीआई के जवाब पर उठे कानूनी सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार किसी भी लोक प्राधिकरण को सामान्यतः 30 दिनों के भीतर मांगी गई सूचना उपलब्ध कराना आवश्यक है। यदि सूचना देने से इंकार किया जाता है तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार बताना भी आवश्यक होता है। ऐसे में सार्वजनिक निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी को व्यक्तिगत सूचना बताकर न देना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि—
टनल निर्माण कार्य पूर्ण होने की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना विधिवत उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन द्वारा अनुमति में निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए ऐतिहासिक तालाब को शीघ्र यथास्थिति में बहाल किया जाए।
यदि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
बड़ा सवाल
यदि विभाग के अनुसार टनल निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, तो फिर स्लीमनाबाद के ऐतिहासिक तालाब की बहाली में आखिर देरी क्यों हो रही है? और यदि कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तो आरटीआई के तहत इसकी स्पष्ट जानकारी देने से परहेज़ क्यों किया जा रहा है?

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