मुहर्रम की 9वीं तारीख पर नया मोहल्ला अकीदत में सराबोर: लंगर, रोजा इफ्तार, सबील और रोशनी से जगमगाईं मस्जिदें व दरगाहें
जबलपुर में मुहर्रम की 9वीं तारीख पर नया मोहल्ला पूरी तरह अकीदत और इबादत के रंग में रंगा नजर आया। बंद कुआं मैदान में फिदा जाने शहीदाने लंगर कमेटी द्वारा रोजेदारों का अवतार का हातमा किया गया ने इबादत की, वहीं शाम को रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। क्षेत्र में लंगर, सबील और ताजियों की रौनक ने माहौल को और भी खास बना दिया।
हाजी अल्ताफ और तनवीर फैसल ने बताया कि
मुहर्रम की 9वीं तारीख के अवसर पर नया मोहल्ला में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए इबादत की। रोजेदारों के लिए विशेष रूप से रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया, जहां सभी ने मिल-बैठकर इफ्तार किया और अमन, भाईचारे तथा मुल्क की खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए जगह-जगह सबील लगाई गई, जहां ठंडा पानी और शरबत वितरित किया गया। वहीं कई स्थानों पर लंगर-ए-हुसैनी का भी आयोजन हुआ, जिसमें सभी धर्मों और समुदायों के लोगों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया। यह आयोजन आपसी भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता नजर आया।
नया मोहल्ला में विभिन्न स्थानों पर ताजिए सजाए गए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ओमती मस्जिद और मशीन वाले बाबा सरकार दरगाह को आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा इलाका आध्यात्मिक और श्रद्धामय वातावरण में डूबा दिखाई दिया। रोशनी से जगमगाती इबादतगाहें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
मुहर्रम की 9वीं तारीख का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देता है कि जबलपुर की गंगा-जमुनी तहजीब आज भी कायम है। अकीदत, सेवा, भाईचारा और इंसानियत की यह मिसाल शहर की सामाजिक एकता को और मजबूत करती है।






