अब बात एक ऐसे मुद्दे की, जिसने एनसीएल परियोजना के अंतर्गत संचालित नेहरू शताब्दी चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में वर्षों से कार्यरत सफाईकर्मियों को नए ठेकेदार के आने के बाद अचानक कार्य से मुक्त कर दिया गया है।
इससे नाराज़ सैकड़ों सफाईकर्मी अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले ठेकेदारों के कार्यकाल में भी उनके साथ लगातार शोषण होता रहा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि सही तरीके से जमा नहीं किया गया, ईएसआईसी की राशि भी नहीं जमा हुई और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ तक नहीं मिल पाया।
इतना ही नहीं, सफाईकर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा निर्धारित वेज रेट के अनुसार उन्हें मजदूरी नहीं दी गई। कर्मचारियों का कहना है कि तय मानक से कम वेतन दिया जाता था और कई बार भुगतान में भी अनियमितताएँ की जाती थीं।
इस पूरे मामले में कर्मचारियों ने नेहरू शताब्दी चिकित्सालय प्रशासन और प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की निगरानी में ही ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी की जाती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
धरना स्थल पर मानव अधिकार संगठन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता संध्या मिश्रा भी पहुँचीं। उन्होंने सफाईकर्मियों की आवाज बुलंद करते हुए कहा कि श्रमिकों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लगातार बढ़ते विरोध और कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए नेहरू शताब्दी चिकित्सालय के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल कर्मचारियों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित उनकी समस्याओं का समाधान होगा और उन्हें न्याय मिल सकेगा।






