अधिकारों की आवाज़: जबलपुर में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मानदेय वृद्धि और वेतन पर्ची की मांग।
शोषण के खिलाफ एकजुटता: भीषण गर्मी में बिना ट्रेनिंग हेड काउंट सर्वे कराने और वेतन रोकने पर भड़कीं आशा कार्यकर्ता।
जबलपुर के घंटाघर पर आज अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक विनय सक्सेना ने बताया आशा उषा पर्यवेक्षक कार्यकर्ता संघ (मध्य प्रदेश) की प्रदेश महासचिव पूजा कनौजिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे लंबे समय से पारदर्शिता के साथ वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) दिए जाने की मांग कर रही हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार से ₹1500 और राज्य सरकार से ₹1000 की मानदेय वृद्धि की भी मांग की जा रही है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के बावजूद उन्हें बिना किसी उचित प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) और प्रपत्र के, आगामी 5 जून तक ‘हेड काउंट सर्वे’ पूरा करने का दबाव दिया जा रहा है, जबकि उनकी आशा डायरी में इस सर्वे का कोई उल्लेख भी नहीं है। कार्यकर्ताओं का लगभग चार महीने का भुगतान रुका हुआ है और पिछले भुगतानों में भी कोई पारदर्शिता नहीं थी, जिससे केवल 60-70 प्रतिशत राशि ही मिल पाई है। पूजा कनौजिया ने कहा कि काम न करने पर सेवा से निकालने की धमकी दी जाती है, जो कि सीधे तौर पर शोषण है। यद्यपि एसडीएम वीरेंद्र सक्सेना और जया मैडम द्वारा आश्वासन दिया गया है, लेकिन कार्यकर्ताओं को डर है कि उनके मुद्दों का स्थाई निराकरण नहीं हुआ, तो उनका शोषण और बढ़ जाएगा।






