कटनी/बहोरीबंद। बहोरीबंद तहसील अंतर्गत छपरा ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश गुरूवार को खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण जनपद पंचायत बहोरीबंद कार्यालय पहुंचे और सरपंच, सचिव तथा रोजगार सहायक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न योजनाओं और मदों में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत कार्यकाल में करोड़ों रुपये के गबन का संदेह है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि वे अपने साथ संबंधित दस्तावेज और प्रमाण लेकर आए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि छपरा ग्राम पंचायत में निर्वाचित सरपंच सुषमा नीरज गुप्ता की जगह व्यवहारिक रूप से उनके पति नीरज गुप्ता ग्राम पंचायत के सभी कार्यो का संचालन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे “प्रॉक्सी सरपंची” बताते हुए पंचायत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया। भीड़ में शामिल लोगों ने सचिव विजय कोरी और रोजगार सहायक आनंद हल्दकार पर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और कहा कि इनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
किन-किन मामलों में लगाए गए आरोप
ग्रामीणों ने जिन मदों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया, उनमें ट्रांसफार्मर तेल खरीद, फर्जी बिलों के भुगतान, मनरेगा कार्यों में अनियमितता, टैंकर आपूर्ति, और ओपन जिम स्थापना जैसे कार्य शामिल बताए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कागजों में दिखाए गए कार्यों और जमीनी हकीकत में अंतर है। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा के तहत दर्ज कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
साक्ष्यों के साथ पहुंचे ग्रामीण
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कथित बिल, भुगतान विवरण और कार्यस्थलों की तस्वीरें होने का दावा किया। उनका कहना है कि ये साक्ष्य पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए थे, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रस्तुत साक्ष्यों को आधिकारिक रूप से दर्ज कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
जनपद में बैठे अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने जनपद स्तर के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना संदेह की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने की मांग की।
जनपद परिसर में नारेबाजी, सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत परिसर में नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर तत्काल एफआईआर दर्ज करने, पंचायत के अभिलेख सुरक्षित रखने और समयबद्ध जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जांच अवधि में संबंधित पदाधिकारियों को प्रशासनिक दायित्वों से अलग किया जाए, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ तत्काल एफआईआर।
प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच।
जांच पूरी होने तक संबंधितों को दायित्वों से पृथक करना।
मनरेगा और अन्य कार्यों का भौतिक सत्यापन।
पंचायत अभिलेखों को सुरक्षित कर सील करना।
निष्पक्ष जांच की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर लगे ऐसे आरोपों की पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि यदि अनियमितताएं हुई हैं तो दोषियों पर कार्रवाई हो सके। वहीं, यदि आरोप निराधार हैं, तो संबंधित पदाधिकारियों की स्थिति भी स्पष्ट हो सके। जनविश्वास बहाल करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई अहम मानी जा रही है।
छपरा ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने बहोरीबंद क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों का जनपद कार्यालय पहुंचना इस बात का संकेत है कि जनता मामले को गंभीरता से देख रही है। अब निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैंकृक्या जांच बैठती है, क्या एफआईआर दर्ज होती है, और क्या सच्चाई सामने आती है।






