कन्हवारा उपार्जन केन्द्र में समर्थन मूल्य खरीदी के नियमों की खुली अनदेखी

संदीप मौर्य

खुले मैदान में खरीदी, बिचौलियों का कब्जा, गुणवत्ता जांच व छन्ना प्रक्रिया पर उठे सवाल

कटनी जिले के कन्हवारा उपार्जन केन्द्र में शासन द्वारा जारी गेहूं उपार्जन दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्राथमिक साख समिति कन्हवारा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य किया जा रहा है, लेकिन केन्द्र पर व्यवस्थाओं की स्थिति बेहद अव्यवस्थित और नियमों के विपरीत दिखाई दे रही है। केन्द्र में फैली अव्यवस्थाओं और बिचौलियों की सक्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है
जानकारी के अनुसार सम्पूर्ण खरीदी केन्द्र खुले मैदान में संचालित किया जा रहा है। मौसम में लगातार बदलाव और आंधी-पानी की संभावना के बावजूद गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए किसी प्रकार की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। न तो पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही अनाज को सुरक्षित रखने के लिए शेड या गोदाम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे किसानों की उपज खराब होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
सूत्रों से खबर है कि कुछ किसानों का आरोप है कि केन्द्र में अधिकृत प्रभारी की जगह बिचौलिये पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसान द्वारा लाए गए गेहूं को पहले निर्धारित स्थान पर स्टॉक किया जाए, उसके बाद गुणवत्ता परीक्षण किया जाए और तत्पश्चात तौल प्रक्रिया पूरी की जाए। लेकिन कन्हवारा उपार्जन केन्द्र में नियमों को ताक पर रखकर सीधे बोरी से गेहूं निकालकर बारदानों में भरकर तौल किया जा रहा है। इससे गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि किसानों की अपेक्षा व्यापारियों के गेहूं की खरीदी को प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ लोगो का कहना है कि कई व्यापारियों का अनाज सीधे तौल के लिए पहुंच रहा है, जबकि वास्तविक किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
शासन द्वारा खरीदी केन्द्रों पर साफ-सफाई और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए छन्ना मशीन उपलब्ध कराई गई है, लेकिन कन्हवारा केन्द्र में यह मशीन केवल शोपीस बनकर खड़ी है। अनाज की सफाई बिना छन्ना किए ही की जा रही है, जिससे गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। केन्द्र प्रभारी की मनमानी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है और नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
पूरे मामले की जानकारी दूरभाष के माध्यम से कन्हवारा तहसीलदार को भी दी जा चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन उपार्जन केन्द्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं, बिचौलियों की दखलअंदाजी और नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई करता है। यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो किसानों से साथ साथ शासन को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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