अनोखी अंतिम यात्रा : गठजोड़ा बनकर बैकुंठधाम गए पति-पत्नी।
90 वर्षीय पति-पत्नी की एक घण्टे के अंतराल में सामान्य मृत्यु होने पर एक ही चिता पर किया अंतिम संस्कार जालोर. साथ जीने मरने की कसमें और जीवन भर साथ निभाने की बातों के कई किस्से सुने जाते है, इसका सौभाग्य हर किसी को नहीं मिल पाता, लेकिन जालोर जिले के बुजुर्ग दम्पति इस कहावत को चरितार्थ कर गए। विवाह के बाद लंबा गृहस्थ जीवन और 90 वर्ष तक की उम्र का साथ निभाते हुए पति-पत्नी अंतिम सांस भी साथ लेकर बैकुंठ धाम गए। शुक्रवार को भवरानी निवासी दरगाराम प्रजापत उम्र 89 वर्ष और उनकी पत्नी पुनीदेवी 90 वर्ष की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली और एक ही चिता पर अग्नि संस्कार भी किया गया। पति -पत्नी दोनों स्वस्थ स्थिति में घर रहते थे, शुक्रवार सुबह हल्का चक्कर आने के बाद अचानक पुनीदेवी का देहांत हो गया। इसकी खबर पोती पिंकी से पाकर पति दरगाराम भी चिंतित हुए और उनका स्वास्थ्य भी खराब होने लग गया। सभी को शांत रहकर परिवार जनों के आने तक रोने का मना किया और करीब एक घण्टे बाद घर पर खुद ही शांत हो गए। शनिवार प्रातः दोनों का सैकड़ो ग्रामीणों और परिवार जनों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। जिस प्रकार दूल्हा अपनी दुल्हन को लेकर शादी के बाद घर पर गठजोड़ा बांधकर घर प्रवेश करता है, उसी प्रकार दोनों की अर्थी भी गठजोड़ा बांधकर निकालते हुए अंतिम विदाई दी गई। प्रत्येक ग्रामीण का कहना यही था कि पूर्व जन्म के सत्कर्म और तपस्या के कारण ही इन्हें ऐसा सौभाग्य प्राप्त हुआ है। गृहस्थ जीवन जीते हुए 90 वर्ष की उम्र पूरी कर भरा पूरा परिवार छोड़कर चलते फिरते देह का त्याग करना इच्छा मृत्यु जैसा उदाहरण है, जो बड़ी मुश्किल से किसी को प्राप्त होता है।






