ऊर्जा विभाग की बैठक: 2027 तक बिजली क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा राजस्थान

मुख्यमंत्री ने ली ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक

राजस्थान बिजली के क्षेत्र में अग्रणी बनने की ओर

विद्युत उत्पादन इकाइयों की क्षमता में करें वृद्धि

किसान, उद्योग और आमजन को हो निर्बाध बिजली आपूर्ति

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
  • राज्य सरकार के प्रयास लाए रंग, गत वर्ष मई माह में बिजली खरीद 8 प्रतिशत, इस वर्ष घटकर आई 2 प्रतिशत पर

जयपुर, 03 जून। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश को वर्ष 2027 तक बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए ऊर्जा विभाग विद्युत उत्पादन और प्रसारण के क्षेत्र में कुशल प्रबंधन से कार्य करे। उन्होंने कहा कि थर्मल, हाइड्रो, सोलर, विंड जैसे माध्यमों से किसानों, उद्योगों और आमजन को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर ऊर्जा विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान बिजली खरीदने वाला नहीं, बल्कि बिजली बेचने वाला अग्रणी प्रदेश के रूप में ओर अधिक मजबूत हो, इसके लिए विभागीय अधिकारी पूर्ण जिम्मेदारी से कार्ययोजना के अनुसार काम करें।

उन्होंने कहा कि विद्युत तंत्र के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कार्यों को गति प्रदान की जाए। साथ ही, 26 जिलों में किसानों को दिन में मिल रही बिजली की सुविधा को शेष जिलों में लागू करने के प्रयासों में भी तेजी लाई जाए। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में हितधारकों को पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्य घर योजना से लाभांवित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी डिस्कॉम विद्युत आपूर्ति की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए समन्वय से कार्य करें। साथ ही, उन्होंने जोधपुर डिस्कॉम में आरडीएसएस के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए शिकायत निवारण तंत्र को तकनीकी स्तर पर ओर अधिक प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में बताया गया कि उत्पादन निगम की कोयला आधारित विद्युत इकाइयों ने 02 जून को सर्वाधिक क्षमता का उपयोग कर 7 हजार 171 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया। इसी प्रकार गत वर्ष मई माह में कुल बिजली आवश्यकता की 8 प्रतिशत बिजली खरीदी गई। वहीं, ठोस एवं प्रभावी प्रयासों से समान अवधि में इस वर्ष महज 2 प्रतिशत बिजली की ही खरीद की गई है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन इकाइयों की क्षमता में वृद्धि के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाएं।

इसी तरह बताया गया कि राज्य सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 60 जीएसएस स्थापित हो चुके हैं। वहीं, 151 जीएसएस का कार्य प्रगति पर है। साथ ही, इसी समयावधि में 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित हुए हैं तथा 211 सब स्टेशन का कार्य प्रगति पर है।

बैठक में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा, ऊर्जा विभाग शासन सचिव आरती डोगरा सहित ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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